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बिहार का सासाराम रेलवे स्टेशन कामयाबी का प्लेटफॉर्म

Posted On: 25 Jun, 2019 Others में

SYED ASIFIMAM KAKVIJust another weblog

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अक्सर देश के दूसरे भागों के छात्र आपस में ये चर्चा करते रहते हैं कि “यार, ये आखिर क्या पढ़ाई करते हैं कि हर प्रतियोगी परीक्षा में इनका दबाव रहता है।” आपको बता दें कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के बारे में ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने लैंप पोस्ट के प्रकाश में पढ़ाई किया था। कुछ ऐसी ही दास्तां है सासाराम के छात्रों की। भारतीय रेल के ठहरने और आगे की यात्रा को पूरा करने का एक पड़ाव है. यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का केंद्र बिंदू है मगर बिहार के सासाराम ज़िले के इस रेलवे स्टेशन की कहानी कुछ और है जो लोगों की सोच और उम्मीद से कहीं बढ़ कर है। बिहार के रोहतास जिले के सासाराम स्टेशन के एक लैम्पपोस्ट के नीचे छात्रों के एक गुट को रोज पढ़ाई करते देखा जा सकता है. रात के समय, आसपास गुजरती ट्रेनों के शोर और यात्रियों की भीड़ से बेखबर वो घेरे में बैठकर अपना काम करते जाते हैं. सासाराम के प्लेटफॉर्म
पर पढाई करनेवाले ये छात्र ‘स्टेशन वाले स्टूडेन्ट्स’ के नाम से मश्हूर हैं. ये बहुत सुव्यवस्थित तरीके से पढ़ाई करते हैं। बताया जाता है की 1992 में सासाराम में बिजली की काफी समस्या थी उसी समय बिहार बदनाम होना भी शुरू हुआ था, चारो तरफ हाहाकार था ,तब छात्रों ने रेलवे स्टेशन पर पढ़ने का फैसला किया और ये फैसला उनके लिए संजीवनी साबित हुआ. मजबूरी में उठाया गया ये कदम धीरे धीरे सासाराम में परंपरा की शक्ल में बदल गया है.सासाराम में छात्रों का कुछ ऐसा समूह है जो हरेक दिन रेलवे स्टेशन की रौशनी में पढ़ाई कर अपना जीवन संवार रहा है। इतना ही नहीं, इनके कामयाबी का आंकड़ा प्रतियोगिता परीक्षा में सबको चौंकाने वाला है। देश की शायद ही कोई प्रतियोगिता परीक्षा हो जिसमें सासाराम रेलवे स्टेशन पर पढ़े बच्चों ने कामयाबी के झंडे नहीं गाड़े हों। सासाराम रेलवे स्टेशन पर पढ़ाई में मशगूल ये विद्यार्थी अलग अलग प्रतियोगिता परीक्षाओं के अभ्यर्थी हैं। इसमें से कुछ ऐसे भी विद्यार्थी हैं जिन्होंने बहुत सारे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता भी प्राप्त कर लिया है। इसी रेलवे स्टेशन पर पढ़ाई कर न जाने कितने विद्यार्थीयों ने रेलवे, SSC, संघ लोक सेवा की परीक्षा में सफलता का इतिहास रच दिया है। छात्रों में अधिकांश वो लोग हैं जो जिले के अलग-अलग गांवों से सासाराम नगर में किराए का कमरा लेकर अपनी पढाई करते है, लेकिन गरीबी के कारण ज्यादातर छात्र कोचिंग नही कर पाते हैं। ऐसे में अगर कोई एक छात्र, मित्र किसी कोचिंग संस्थान का नोट्स लाता हैं तो पूरा ग्रुप पढ लेता है। इस तरीके से सभी छात्र मिल कर प्रतियोगी परीक्षा का तैयारी करते हैं हर शाम यहां सैकड़ों छात्र आते हैं और अलग अलग कॉम्पटीशन में अपनी तैयारियों को अंजाम देते हैं। यहां आने वाले ज्यादातर वैसे छात्र होते है जो कोचिंग की महंगी फीस नही भर सकते हैं। अब जब बिहार में बिजली की परेशानी ना के बराबर है तब भी विद्यार्थीयों के लिए स्टेशन पर पढ़ाई करना एक परंपरा के जैसे बन गया है। स्टेशन प्रशासन ने बताया कि स्टूडेंट्स स्टेशन की लाइट में पढ़ते हैं, इसपर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों ने बताया कि यह उनके लिए प्रेरणा देने वाला है। स्टूडेंट्स से उन्हें कोई परेशानी नहीं होती है। स्टूडेंट्स ने बताया कि जब वे पढ़ाई करते हैं तो यात्री भी उनका साथ देते हैं और शांत रहते हैं, जिससे वे अपनी पढ़ाई अच्छे से कर पाते हैं। आज जब बिजली में सुधार हुआ है,तब भी सासाराम स्टेशन पर आकर पढ़ाई करना एक परंपरा जैसी बन गई है।

सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

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