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कलम तो चलेगी और बेबाक चलेगी

Posted On: 16 Jun, 2015 Others में

ताहिर की कलम सेमन की बात

Tahir Khan

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ुःख तो बहत हआ, और अभी हो रहा है, ये दुःख तब तक दुःख देगा जब तक पापी हयार को सजा न िमल जाए और उह भी इस दुःख का दुःख न हो जाए ! लेिकन या समाज म पकार होना पाप है? पकार छोिड़ये इंसान होना गुनाह है या ? या समाज म िछपी बुराइय को जनता से बताना कोई अपराध है? या सचाई के साथ जीने का मतलब बम िवफोट करना है? सफ़ेद पोशाक वाले लोग से आ रही ाचार क बू ने इस समाज म आज गंध मचाई हई है। या लोकतं यही है ? जनिहत का काम यही है ! और मेरी कलम इतजार करती रहेगी तुहारे मारने-पीटने या जलाने का? नह ! ये कलम तो तब तक चलेगी जब तक पकार के सीने म एक-एक साँस बाक है। कलम तो चलेगी और बेबाक चलेगी । एक देश म एक राममूित या पूरे देश म एक हजार राममूित भी पैदा हो जाय तो सचे पकार क कलम पर िवराम नह लगा सकते । ना जाने िकतने सचे पकार जागे बनकर राममूित जैसे लोग के जुम से पदा उठाने के लए हाथ म कलम लये अपनी िज़ंदगी दांव पर लगाये बैठे ह । एक मंी के साथ-साथ पुलस िवभाग पर भी सवालयां िनशान खड़े हो जाते ह अपने आपको जनता के िहतैषी कहने वाले को एक सचे पकार क जान लेने क परिमशन िकसने दी ? समाजवाद और समाजवादी दशन यही है िक समाज -देश , लोकतं और जनसामाय को मजबूत करने के बजाय लोकतं को ही कुचल िदया जाय ? कहने वाली सरकार म ये समाज म या संदेश दे िदया। या अखलेश सरकार अपराधय को बचा रही है ? या सरकार को डर है वोट बक कम होने का? या राममूित वमा को सजा देने से कुम-लोधी समाज का वोट बक खम हो जाएगा? अरे साहब ! यिद समाजवादी छिव वाकई बनानी है तो भूलना होगा उस कुम और यादव वोट बक को , वरना ये जनता भली-भांित जानती है या समाजवाद और या आतंकवाद? लेिकन सच लखना आज यिद जान देकर इतना महंगा पड़ रहा है । जग को दुःख इस बात का नह क उसक जान सचे राते पर चली गई बक दुःख इस बात का है क मीिडया का पूरा साथ उस व नह िमल सका जस व उसक जरत थी । मीिडया अब बाद म जतना हो-हा जग क मौत के बाद तमाम टीवी चैनल पैनल िडकसन लगातार िकये जा रहे ह । उससे िकस नतीजे पर पहंचा जा सकता है । अब तो इंसाफ हो जद से जद और अखलेश सरकार दोषी पुलस वाले और मंी को सफ बखात ही नह बक कड़ी सजा देकर एक उदाहरण पेश करे । गांधी , आंबेडकर , लोिहया, दीनदयाल के सपन को कब तक हमारे िनयंता कुचलते रहगे ?

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