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अमेजॉ़न के जंगल मिटने से मानव जाति भी मिट जायेगी!

Posted On: 10 Jul, 2019 Common Man Issues में

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“प्रकृति एक सुंदर काँच के समान है, जो टूट जाने पर तेज़ धार हथियार बन जाता है।”

वृक्ष प्रकृति की एक अनमोल देन है। वृक्ष हमारे परम हितैसी निःस्वार्थ सहायक अभिन्न मित्र हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में वृक्षों का अत्यधिक महत्व है। वृक्षों के बिना अधिकांश जीवों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। वृक्षों से ढके पहाड़, फल और फूलों से लदे वृक्ष, बाग, बगीचे मनोहारी दृश्य उपस्थित करते हैं और मन को शांति प्रदान करते हैं। वृक्षों से अनेकों लाभ हैं जैसे वृक्ष अपनी भोजन प्रक्रिया के दौरान वातावरण से कार्बन डाइ ऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिससे अनेक जीवों का जीवन संभव हो पाता है। वृक्षों से हमें लकड़ी, घास, गोंद, रेजिन, रबर, फाइबर, सिल्क, टैनिन, लैटेक्स, हड्डी, बांस, केन, कत्था, सुपारी, तेल, रंग, फल, फूल, बीज तथा औषधियाँ प्राप्त होती हैं। वृक्ष पर्यावरण को शुद्ध करने का कार्य करते हैं और प्रदूषण को दूर करते हैं। ध्वनि प्रदूषण को दूर करते हैं। वायु अवरोधक की तरह काम करते हैं और इस तरह आँधी तूफान से होने वाली क्षति को कम करते हैं। वृक्ष की जड़ मिट्टी को मजबूती से पकड़ कर रखती है जिससे भूमि कटान रुकता है। और 2013 में उत्तराखंड में हुयी त्रासदी की खबरें बार-बार सुनने को नहीं मिलती।

प्रकृति अगर सृजक है तो प्रकृति ही विनाशक भी है।वन ही धरती पर रहने वाले सभी जीवों का पालन पोषण करते हैं। इसलिए वनों के तबाह होने से सब कुछ तबाह हो जाएगा। परंतु आज का मनुष्य अपनी अनगिनत व कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए इन वनों को नष्ट करता जा रहा है। वह इस हद तक स्वार्थी हो गया है कि उसे न अपने आने वाले कल की चिंता और ना ही अपनी आने वाली पीढ़ियों की।

अमेजॉन वर्षावन दुनिया का सबसे बड़ा वन है।जिसका क्षेत्र नौ देशों मे फैला हुआ है और वन का सबसे बडा़ हिस्सा ब्राजील देश मे मौजूद है। यह दूनिया के सबसे सुंदर वनों मे से एक है। इतिहास के अनुसार अमेजॉन वन मे रहने वाले लोग भोजन,घर,ईंधन, पानीऔर दवा के लिए पूर्ण रूप से इस वन पर निर्भर हैं ।यहाँ तक की इस वन से ही उनके अस्तित्व की पहचान भी जुड़ी हुई है। उनके लिए यह वन पूजनीय है।यही कारण है कि 2015 तक वन के इस हिस्से का केवल 8 प्रतिशत तक ही निर्वीकरण हुआ।जबकि वन के 50 प्रतिशत अरक्षित हिस्से मे 88 प्रतिशत तक वनरहित हो चुका है।

साल 2018 के आकड़ों के अनुसार अगस्त 2017 व 2018 के बीच वर्षावन का 7900 की.मी एकड़ का क्षेत्र नष्ट हो चुका है।जिनके प्रमुख कारण लकड़ियों के लिए अवैध रूप से वृक्षों कटाई, वनों से मिलने वाले द्रव्यों की बढ़ती माँग , खेती के क्षेत्र मे विस्तार व पशुओं द्वारा चराई हैं।वन विभाग की जाँच के अनुसार वर्षावन कुछ हद तक ऐसे बिंदू पर पहँच चुका है जहाँ उसके लिए अपने संरक्षण के लिए ही वर्षा उत्पन्न करना असंभव हो गया है।
16वीं शताब्दी के बाद गरीबी व बिमारियों जैसे कारणों की वजह से वन से लोगों नको पलायन करना पड़ा।जिस कारण वन ओर घने होने लगे। सन् 1970 से पूर्व सड़कें ना होने के कारण वर्षावन तक पहुँचना आसान नही था।परंतु ट्रांस अमेजॉन हाईवे के निर्माण ने वननाशन जैसी समस्या को जन्म दिया।जैसे जैसे लोगों का बसाव बढ़ता गया अपनी लोगों ने अपनी ज़रूरतों के वन को नष्ट करना शुरु कर दिया।2016 मे बनाई गई एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के बढ़ते कच्चे तेल का आयात वननाशन व ग्रीन हाउस के विस्तार का प्रमुख कारण है। साथ ही वर्ल्ड अर्थव्यवस्था को 33 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हर वर्ष होगा अमेज़ॉन के वनों की कटाई से।

अंतरराष्ट्रीय संस्था नासा का मानना है कि अगर समय रहते वर्षावन मे पेड़ों की कटाई पर रोक नही लगाई गई तो इसके साथ अगले 100 सालों मे दुनिया मे बचे हुए अन्य वनों का भी अंत हो जाएगा।अमेजॉन के बढ़ते निर्वीकरण से मौसम बदलाव मे भी वृद्धि होगी।जो विश्व के सभी देशों के लिए बेहद चिंता का विषय है।यही नही इससे वन मे रहनेवाले आदिवासी लोगों को अपने आश्रय व जीवन व्यापन के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ेगा।
अमेजॉन मे हो रही लगातार वृक्षों की कटाई से वन के बंजर होने जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।और वन की जैव विविधता को भी गहरा नुकसान हो सकता है।कई जीवों के लुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।बढ़ते वनविनाशन के कारण ब्राजील मे स्वच्छ जल की आपूर्ति मे भी मुश्किलें आ रही हैं ।क्योंकि वर्षावन सिर्फ ब्राजील ही नही अपितु कई देशों में वर्षा का एक अहम स्त्रोत है। वनविनाशन के कारण ब्राजील के तापमान मे 1.45 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है।जो वहाँ के लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

वन की सुरक्षा के लिए विभिन्न देश की सरकारों द्वारा महत्त्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।2019 मे इक्वेडोर देश की अदालत ने तेल के अन्वेषण जैसी गतिविधियों पर रोक लगा दी है।इसके अतिरिक्त कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी अमेजॉन की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठा रही हैं।पर लोगों के योगदान के बिना कोई भी प्रयास पूर्ण रूप सफल नही हो सकता।इसलिए सरकार को चाहिए कि वह लोगों को उनके फर्ज़ के प्रति जागरूक कर व वहाँ रहने वाले निवासियों के सहयोग प्राप्त कर इस कार्य मे बिना किसी विरोध व परेशानी से आगे बढ़ें।

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