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भाजपा का सिरदर्द बन गए केजरीवाल – Jagran Junction Forum

Posted On: 29 Dec, 2013 Politics में

the third eyeThat it looks unlikely that both eyes

tejwanig

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कांग्रेस के लिए संकट पैदा करने के लिए अन्ना हजारे के आंदोलन को पीछे से समर्थन करने वाली भाजपा के लिए उसी आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी अब सिरदर्द बन गई है। बड़ी मेहनत से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने वाली भाजपा को दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद लगने लगा है कि कहीं वह आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी के प्रधानमंत्री बनने में बाधक न बन जाए। इसके स्पष्ट संकेत सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मोदी व केजरीवाल की हो रही तुलनात्मक जंग से मिल  रहे हैं। यह एक खुला सत्य भी है कि चार राज्यों भाजपा की जीत का श्रेय जिस मोदी लहर को दिया जा रहा है, वह मोदी की अनेक सभाओं के बाद भी दिल्ली में कामयाब नहीं हो पाई।
असल में कांग्रेस के खिलाफ विपक्ष की भूमिका ठीक से न निभा पाने के कारण ही अन्ना हजारे को उभरने का मौका मिला और उन्होंने इतना तगड़ा आंदोलन चलाया कि एक बारगी पूरा देश उबलने लगा। यह भी सच है कि कांग्रेस को घेरने के लिए उस आंदोलन को पीछे से भाजपा ही सपोर्ट कर रही थी। हालांकि बाद में कई कारणों से आंदोलन तो कमजोर पड़ गया, मगर अन्ना के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने अन्ना की असहमति के बावजूद एक नई राजनीतिक पार्टी बना ली। इस पार्टी को हल्के में ही लिया गया, मगर उसने दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐसा चमत्कार कर दिखाया कि सभी भौंचक्के रह गए। कांग्रेस का तो सूपड़ा साफ हो ही गया और भाजपा भी बहुमत से थोड़ा सा पीछे रह गई। किसी को भी स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण दुबारा चुनाव की नौबत आ गई, मगर कांग्रेस ने चतुराई से केजरीवाल को समर्थन दे कर उनकी सरकार बनने का रास्ता साफ कर दिया। जाहिर है इसके पीछे मोदी को आंधी को कमजोर करने की सोच है। हालांकि यह सरकार बैसाखियों पर ही टिकी हुई है, मगर उसे जितना भी समय मिलेगा, वह कुछ न कुछ नया करके अपना वर्चस्व बढ़ा लेगी।
दिल्ली में मिली सफलता के बाद अब आम आदमी पार्टी का अगला लक्ष्य लोकसभा चुनाव है। इसके लिए उसने जोरदार तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में भाजपा को यह डर सता रहा है कि अगर उसने चुनिंदा एक सौ सीटों पर भी अपने प्रत्याशी खड़े किए और उनमें से भले ही उसे कुछ पर ही जीत हासिल हो, मगर भाजपा का समीकरण जरूर बिगाड़ देगी। इसका सीधा सीधा अर्थ ये है कि केजरीवाल को जिस प्रकार मीडिया राजनीति के एक नए अवतार के रूप में प्रोजेक्ट कर रहा है, उससे कथित रूप से आंधी का रूप ले चुके मोदी का असर कम हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि कोई एक साल पहले बनी आम आदमी पार्टी ने 22 राज्यों में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया है। उसने गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में सभी लोकसभा सीटों पर लडऩे का ऐलान कर दिया है। भाजपा की  सोच है कि मोदी के सामने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तो नहीं टिक पाएंगे, मगर 12 करोड़ नए युवा मतदाताओं पर केजरीवाल की उतनी ही पकड़ है, जितनी कि मोदी की। सोशल मीडिया पर अब तक मोदी ही छाये हुए थे, मगर सोशल मीडिया के माध्यम से ही आंदोलन चलाने वाले आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी बराबर की टक्कर दे रहे हैं। माना जा रहा है कि 150 शहरी सीटों पर सोशल मीडिया का प्रभाव रहेगा, जहां अब तक मोदी की ही पकड़ थी, मगर अब केजरवाल भी खम ठोक कर मैदान में उतर सकते हैं। इस मसले एक पहलु पर मतभिन्नता है, वो यह कि केजरीवाल मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा के गढ़ में सेंध लगा कर कांग्रेस विरोधी मतों को बांटेंगे या फिर दिल्ली विधानसभा चुनाव की तरह कांग्रेस को ही ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी।
जानकार मानते हैं कि आम आदमी पार्टी को ज्यादा आशा दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कनार्टक में है। भाजपा के प्रभाव वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड, गोवा, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में आम आदमी पार्टी को जोर आएगा।
राजस्थान में आप के तकरीबन 30 सदस्य हैं, मगर पार्टी का संगठित ढ़ांचा नहीं है। उधर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में अभी तक शुरुआत भी नहीं कर पाई है। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, वह भाजपा का गढ़ तो नहीं, मगर भाजपा को मोदी लहर के दम पर सफलता की उम्मीद है। लेकिन समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के बाद अब आम आदमी पार्टी भी वोटों को बांटेगी। वहां आम आदमी पार्टी ने पांच जोनल ऑफिस खोल लिए हैं। इसी प्रकार आम आदमी पार्टी ने हरियाणा के 21 में 18 जिलों में ऑफिस बना लिए हैं। ज्ञातव्य है कि केजरीवाल का पैतृक गांव हरियाणा के भिवानी में है और दूसरे वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव भी हरियाणा के रेवाड़ी से हैं। कर्नाटक की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने 18 जिलों में अपनी इकाइयां गठित कर ली हैं। उत्तराखंड में राजधानी देहरादून सहित 13 जिलों में पार्टी की इकाइयां हैं। झारखंड के राजधानी रांची सहित 17 जिलों में पार्टी कार्यालय चल रहे हैं।
कुल मिला कर आम आदमी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में कई सीटों पर भाजपा को मिलने वाले कांग्रेस विरोधी वोटों में सेंध मार सकती है। अगर ऐसा हुआ तो मोदी के नाम पर सत्ता पर काबिज होने वाली भाजपा का सपना टूट सकता है।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

arvind kejariwal 2कांग्रेस के लिए संकट पैदा करने के लिए अन्ना हजारे के आंदोलन को पीछे से समर्थन करने वाली भाजपा के लिए उसी आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी अब सिरदर्द बन गई है। बड़ी मेहनत से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने वाली भाजपा को दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद लगने लगा है कि कहीं वह आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी के प्रधानमंत्री बनने में बाधक न बन जाए। इसके स्पष्ट संकेत सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मोदी व केजरीवाल की हो रही तुलनात्मक जंग से मिल  रहे हैं। यह एक खुला सत्य भी है कि चार राज्यों भाजपा की जीत का श्रेय जिस मोदी लहर को दिया जा रहा है, वह मोदी की अनेक सभाओं के बाद भी दिल्ली में कामयाब नहीं हो पाई।

असल में कांग्रेस के खिलाफ विपक्ष की भूमिका ठीक से न निभा पाने के कारण ही अन्ना हजारे को उभरने का मौका मिला और उन्होंने इतना तगड़ा आंदोलन चलाया कि एक बारगी पूरा देश उबलने लगा। यह भी सच है कि कांग्रेस को घेरने के लिए उस आंदोलन को पीछे से भाजपा ही सपोर्ट कर रही थी। हालांकि बाद में कई कारणों से आंदोलन तो कमजोर पड़ गया, मगर अन्ना के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने अन्ना की असहमति के बावजूद एक नई राजनीतिक पार्टी बना ली। इस पार्टी को हल्के में ही लिया गया, मगर उसने दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐसा चमत्कार कर दिखाया कि सभी भौंचक्के रह गए। कांग्रेस का तो सूपड़ा साफ हो ही गया और भाजपा भी बहुमत से थोड़ा सा पीछे रह गई। किसी को भी स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण दुबारा चुनाव की नौबत आ गई, मगर कांग्रेस ने चतुराई से केजरीवाल को समर्थन दे कर उनकी सरकार बनने का रास्ता साफ कर दिया। जाहिर है इसके पीछे मोदी को आंधी को कमजोर करने की सोच है। हालांकि यह सरकार बैसाखियों पर ही टिकी हुई है, मगर उसे जितना भी समय मिलेगा, वह कुछ न कुछ नया करके अपना वर्चस्व बढ़ा लेगी।

दिल्ली में मिली सफलता के बाद अब आम आदमी पार्टी का अगला लक्ष्य लोकसभा चुनाव है। इसके लिए उसने जोरदार तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में भाजपा को यह डर सता रहा है कि अगर उसने चुनिंदा एक सौ सीटों पर भी अपने प्रत्याशी खड़े किए और उनमें से भले ही उसे कुछ पर ही जीत हासिल हो, मगर भाजपा का समीकरण जरूर बिगाड़ देगी। इसका सीधा सीधा अर्थ ये है कि केजरीवाल को जिस प्रकार मीडिया राजनीति के एक नए अवतार के रूप में प्रोजेक्ट कर रहा है, उससे कथित रूप से आंधी का रूप ले चुके मोदी का असर कम हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि कोई एक साल पहले बनी आम आदमी पार्टी ने 22 राज्यों में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया है। उसने गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में सभी लोकसभा सीटों पर लडऩे का ऐलान कर दिया है। भाजपा की  सोच है कि मोदी के सामने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तो नहीं टिक पाएंगे, मगर 12 करोड़ नए युवा मतदाताओं पर केजरीवाल की उतनी ही पकड़ है, जितनी कि मोदी की। सोशल मीडिया पर अब तक मोदी ही छाये हुए थे, मगर सोशल मीडिया के माध्यम से ही आंदोलन चलाने वाले आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी बराबर की टक्कर दे रहे हैं। माना जा रहा है कि 150 शहरी सीटों पर सोशल मीडिया का प्रभाव रहेगा, जहां अब तक मोदी की ही पकड़ थी, मगर अब केजरवाल भी खम ठोक कर मैदान में उतर सकते हैं। इस मसले एक पहलु पर मतभिन्नता है, वो यह कि केजरीवाल मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा के गढ़ में सेंध लगा कर कांग्रेस विरोधी मतों को बांटेंगे या फिर दिल्ली विधानसभा चुनाव की तरह कांग्रेस को ही ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी।

जानकार मानते हैं कि आम आदमी पार्टी को ज्यादा आशा दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कनार्टक में है। भाजपा के प्रभाव वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड, गोवा, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में आम आदमी पार्टी को जोर आएगा।

राजस्थान में आप के तकरीबन 30 सदस्य हैं, मगर पार्टी का संगठित ढ़ांचा नहीं है। उधर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में अभी तक शुरुआत भी नहीं कर पाई है। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, वह भाजपा का गढ़ तो नहीं, मगर भाजपा को मोदी लहर के दम पर सफलता की उम्मीद है। लेकिन समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के बाद अब आम आदमी पार्टी भी वोटों को बांटेगी। वहां आम आदमी पार्टी ने पांच जोनल ऑफिस खोल लिए हैं। इसी प्रकार आम आदमी पार्टी ने हरियाणा के 21 में 18 जिलों में ऑफिस बना लिए हैं। ज्ञातव्य है कि केजरीवाल का पैतृक गांव हरियाणा के भिवानी में है और दूसरे वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव भी हरियाणा के रेवाड़ी से हैं। कर्नाटक की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने 18 जिलों में अपनी इकाइयां गठित कर ली हैं। उत्तराखंड में राजधानी देहरादून सहित 13 जिलों में पार्टी की इकाइयां हैं। झारखंड के राजधानी रांची सहित 17 जिलों में पार्टी कार्यालय चल रहे हैं।

कुल मिला कर आम आदमी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में कई सीटों पर भाजपा को मिलने वाले कांग्रेस विरोधी वोटों में सेंध मार सकती है। अगर ऐसा हुआ तो मोदी के नाम पर सत्ता पर काबिज होने वाली भाजपा का सपना टूट सकता है।

-तेजवानी गिरधर

7742067000

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