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गांधी वध और गोडसे की देशभक्ति!

Posted On: 19 May, 2019 Politics में

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Suresh Tewari

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कमलहासन के बेतुके बयान के बाद गांधी जी की हत्या और गोडसे की देशभक्ति पर एकबार फिर उबाल आ गया है।साध्वी प्रज्ञा द्वारा गोडसे को देशभक्त बताते ही कांगिये एक बार फिर कूदने फांदने लगे हैं।

देश से बढ़कर कोई भी इन्सान नहीं हो सकता चाहे वह महात्मा गांधी ही क्यों न हो।एकबार नेहरू की देशभक्ति पर सवाल उठाए जा सकते हैं पर सच पूछा जाय तो गोडसे की देशभक्ति निःसन्देह सम्पूर्ण है।हम उन्हें सिर्फ़ इसलिए देशभक्त कहने से वंचित नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने गांधी जी का वध किया और वध भी अपने स्वार्थ के लिये नहीं अपितु देश और देशभक्ति के लिये किया।
हिन्दुओं में किसी का वध तभी किया जाता था जब उस मनुष्य की उपस्थिति अन्य लोगों के लिये घातक बन जाती थी या अपनी आत्मरक्षा या परिवार या सम्पत्ति या देश की रक्षा हेतु अन्य कोई उपाय न बचता हो।

गांधीजी की हत्या किसी आतंकी गतिविधि के अन्तर्गत नहीं थी, न जनमानस में भय पैदा करने के लिये थी…। गोडसे का अन्तिम बयान बखूबी बताता है कि किन परिस्थितियों में गांधी जी का वध करना आवश्यक हो गया था और अगर वह नहीं होता तो देश को कितना बड़ा संकट और नुकसान उठाना पड़ता..

हम यहां किसी प्रकार इस हत्या को उचित नहीं ठहराना चाहते…इस बारे में जनता स्वयं निर्णय ले सकती है। हां कानूनी तौर पर यह जुर्म था जिसकी सजा कानून के तहत गोडसे को दी गयी….और जिसे गोडसे ने सहर्ष स्वीकार किया..

महाभारत काल में अर्जुन को गुरू द्रोणाचार्य और अपने पितामहः भीष्म का वध करना पड़ा क्योंकि वे अनीति और राष्ट्र के विरोध में खड़े थे। वैसे ही महात्मागांधी अपनी सोच के चलते भारत के हितों के विरुद्ध खड़े थे फिर किसी अर्जुन को तो खड़ा होना ही था। और न तो अर्जुन आतंकी थे न गोडसे देशद्रोही….

अगर किसी को कटघरे में खड़ा करना ही है तो उसे पकड़ें जिसने देश विभाजन की मंजूरी दी और लाखों लोगों का कत्लेआम, बलात्कार और धर्म परिवर्तन करवाया, उसे पकड़ो जिसने आधा कश्मीर और पूर्वोत्तर को पाकिस्तान और चीन की झोली में डाल दिया,उसे पकड़ो जिसने कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम और विस्थापन को होने दिया, उसे पकड़ो जिसने हजारों सिक्खो को जिन्दा जलवा दिया।

नेहरू और गांधी ने हमेशा भगतसिंह, राजगुरु,खुदीराम बोस,चन्द्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाषचंद्रबोस जैसे स्वतन्त्रता सेनानियों को सदा आतंकी ही माना और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जो स्थान मिलना चाहिए था उससे हमेशा वंचित रखा।कांग्रेसियों की वही सोच अगर गोडसे के बारे में भी है तो कोई नयी बात नहीं।

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