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भारत /अन्ना : गृह युद्ध की ओर......?

Posted On: 1 Aug, 2012 Others में

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Vikram Adetya

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सरकार पर भरोसा नहीं ,सरकारी डाक्टरों पर भरोसा नहीं , प्रधानमंत्री से बात नहीं करेंगे , तो फिर किस से करेंगे बात ..क्या किसी विदेशी ताकत से करेंगे समझौता ?किसके इशारे पर हो रहा है ये खेल ? कौन है इनके पीछे ? सार्वज़निक मंच से जनता में उत्तेजना फ़ैलाने के पीछे कौन सा राज छिपा है ? प्रधान मंत्री सहित अनेक मंत्रियों के घरों पर हिंसक हमला करने का राज क्या है ?

केजरीवाल और अन्ना का यह कहना क़ि अगर सरकार केजरीवाल को अस्पताल या जेल ले जाये तो जनता का काम है, उन्हें अस्पताल से बाहर ले आना , साफ़ साफ़ बताता क़ि सरकार के खिलाफ विद्रोह करो .
भले ही अन्ना और केजरीवालक की टीम यह कहे क़ि वह लोग देश के लिए बलिदान कर रहें हैं , आत्म हत्या नहीं , पर जो भी सरकार है , उसका यह कर्तव्य बनता कि वह अपने नागरिकों क़ी रक्षा करे और संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अपना कर्तव्य निभाए .

अगर अन्ना या और किसी को सरकार के क़दमों पर आपत्ति है तो उसे अधिकार है क़ि वह अपने क़ानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करे न क़ि अराजकता पूर्ण गतिविधिया करने पर उतारू हो जाये , अगर सरकार से न्याय नहीं मिल रहा तो न्यायालय का रास्ता खुला है परन्तु मनमानी करने क़ि इजाजत किसी को नहीं दे जा सकती
एक तरह से अन्ना और उनकी टीम द्वारा अपनाया जा रहा आचरण , सरकार के खिलाफ एक तरह का विद्रोह ही है , जिसकी इज़ाज़त न कानून देता है और न संविधान .

अन्ना और केजरीवाल की टीम का उद्देश्य सही हो सकता है , उनका कथन देश हित में हो सकता है पर , उनके द्वारा अपनाया गया रास्ता सही नहीं है . गाँधी जी का उदाहरण देने वालों को यह समझना चाहिए क़ि वह एक विदेशी सरकार के विरुद्ध लड़ रहे थे , देश की निर्वाचित सरकार के खिलाफ नहीं . इसलिए कुतर्कों का सहारा न लिया जाये तो ही देश का हित होगा और जनता का भी

अरे इस हठधर्मिता की वज़ह क्या है ? सरकारी तंत्र पर भरोसा न करने की बात कह कर क्या बताना चाहती है , अन्ना और उनके सहयोगी . क्या इस तरह के बाते किसी साजिश का इशारा तो नहीं है .

भारत का नागरिक अपनी मांगों के लिए कहाँ जायेगा , प्रधानमंत्री से नहीं तो किस के पास जायेगा . साफ़ साफ़ यह भारतीय सत्ता को चुनौती देने जैसी बात नहीं है तो क्या है ?

सरकार का भी दायित्व बनता है क़ि वह देश के नागरिकों क़ी जायज़ मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करे और अहम् का रास्ता छोड़ कर एक लोकप्रिय सरकार का कर्तव्य निभाते हुए जनहितैषी सरकार होने का परिचय दे .

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