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वैश्विक आपदा हमारा देश और Team Work

Posted On: 7 May, 2020 Others में

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vikas79

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आज विश्व एक ऐसी समस्या से गुजर रहा है जिसमे की हमारा देश भी अछूता नहीं है। क्या इस घडी में हमारा देश एक Team की तरह से काम कर सकता है। और अगर हाँ तो कैसे? आइये थोड़ा विचार करते हैं। देखा जाए तो हमारा देश स्वतंत्रता के बाद से ही आपदा में है। आप ही सोचिए जहां 15 करोड़ की जनसँख्या गरीबी रेखा के नीचे है क्या ये अपने आप में एक आपदा नहीं है। पहले अँगरेज़ लूट कर गए । प्राकृतिक संसाधन भी नष्ट हो चले थे । नदी, तालाब , पेड़, जंगल सारी व्यवस्था सब तहस नहस हो चुकी थी । कई लोग बर्बाद हो गए थे और बुरी हालत में जी रहे थे

 

 

 

आज कई दशकों बाद भी हम प्रकृति, पेड़ और देश की माली व्यवस्था पुनः स्थापित नहीं कर सके । क्यूंकि हम पे निजी महत्वाकांक्षाएं हावी हो गयी थी । ना किसी ने देश को टीम की तरह देखा ना टीम वर्क का सोचा ही । Team Work के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की अगर हम टीम वर्क करते तो देश कुछ ही दशकों में काफी तरक्की कर चूका होता । जब अँगरेज़ लूट कर गए तब भी अगर हम भाईचारे के साथ रहते तो कोई इस देश में बुरे हालात में नहीं होता।

 

 

 

मैं मानता हूँ की हमारे भाईचारे का दुश्मन और कोई नहीं केवल ये मार्किट है। हमारी और आपकी fancy चीज़ों की चाहत ही हमारे आड़े आती है। किसी को महँगी गाडी चाहिए, कोई विदेशी ब्रांड के कपड़े पहनना चाहता है। लोग शादी के जलसे पर लाखो खर्च करने के लिए तैयार हैं मगर गरीबों की ज्यादा मदद करने की कोई नहीं सोच पाता। महत्वाकांक्षा हम पर इस कदर हावी हो गयी है की अगर हम पढ़ लिख कर कुछ बनना चाहते हैं तो भी केवल अपनी निजी जिंदगी में सुधार के लिए । आइये उस team work की बात करते हैं जो निजी महत्वाकांक्षा से परे है । क्यूंकि इसे आज़ादी के परिप्रेक्ष्य में समझाना ज्यादा आसान है इसीलिए मैं इसे आपको उस समय के उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ ।

 

 

 

कल्पना कीजिये की जब देश को स्वतंत्रता मिली थी तब से हम लोग इसका हिसाब लगाते की देश को एडवांस तरीके से चलाने के लिए कितने doctors, engineers, कृषि, सैनिक और वैज्ञानिको की जरूरत है | इसी तरह बाकी पदों की भी गणना की जाती । यह लोग उतनी ही तनख्वाह लेते जितने में की इनका काम चल जाता । और करोड़ों लोगो की दुआएं मिलती सो अलग ।फिर काबिल नव युवकों और अनुभवी लोगों को देश के विकास के कार्यों में लगाया जाता मगर देश भक्ति की भावना से ओत प्रोत हो कर ना की निजी महत्वाकांक्षा से।

 

 

 

लोग सरल ढंग से साधारण से घर में रहते, गाडी का उपयोग निजी नहीं केवल जरूरी कामो के लिए करते, इसमें सारा देश योगदान करता। देश की अर्थव्यवस्था का निर्माण करते और सभी की रहने और खाने की जरूरतों को पूरा करते। इस तरह ना केवल कोई भूखा सोता या बेरोज़गार होता न बेघर होता, सब अपने ही होते । ये देश न सिर्फ तरक्की करता बल्कि जल्दी ही अपनी खोयी हुई दौलत भी प्राप्त कर लेता और बहुत जल्द ही एक महान शक्ति होता। क्यूंकि ऐसे में हम काफी पैसा बचा लेते फालतू की चीज़ों को नहीं खरीदते और बेमतलब के खर्चे नहीं करते। संभावनाएं असीमित हैं । खैर, उस वक्त तो ऐसा हो नहीं पाया मगर अब अगर जरूरत पड़े तो अपनी महत्वाकांक्षाओं का त्याग करके ऐसा कर सकते हैं।

 

 

 

क्या हमारा देश इस समय में team work की तरह काम कर सकता है अगर जरूरत पड़े तो। हाँ हो सकता है, मैं जानता हूँ यह हम सबके लिए करना आसान नहीं होगा मगर देखिए तो उतना मुश्किल भी नहीं होगा। मैं जानता हूँ की आप में से कई लोगों को मेरे विचार से सहमति नहीं होगी । यहाँ तक की हो सकता है की कुछ लोग नाराज़ भी हो जाएँ । मगर इसका केवल एक कारण है और वो यह की आपके विचार अलग हैं । आप कमेंट में अपने तर्क रख सकते हैं।

 

 

 

नोट : ये लेखक के निजी विचार हैं और इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी हैं।

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