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यूपी की राजनीति पर अपनी छाप छोड़ने वाले योगी आदित्यनाथ का सफर उनके अंदाज की तरह बेहद खास

Posted On: 19 Sep, 2019 Politics में

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vinaykatiyar

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गोरखपुर से राजनैतिक गलियारों में कदम रखने वाले योगी आदित्यनाथ के जीवन का सफर काफी खास है। बचपन में गणित विषय के तेज तर्रार छात्र अजय सिंह नेगी ने कब संन्यास का कदम उठाकर एक राजनेता के रूप में खुद को विकसित किया इसकी कहानी कुछ ही लोगों को पता है।

 

पौड़ी गढ़वाल छोड़ा गोरखपुर पहुंचे
योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ है। योगी एक राजपूत परिवार से आते हैं। उनका बचपन का नाम अजय सिंह नेगी था। योगी आदित्यनाथ की पढ़ाई सन 1977 में टिहरी के गजा में स्थित स्कूल में शुरू हुई। सन् 1987 में यहां से ही उन्होंने 10वीं की परीक्षा दी। सन् 1989 में ऋषिकेश के श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज से इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और साथ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े। योगी आदित्यनाथ की पढाई में बाधाएं आई जब वे कोटद्वार में रह रहे थे। उस दौरान उनके कमरे से उनका सामान चोरी हो गया, जिसमें उनके प्रमाण पत्र भी थे। 1993 में गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर रिसर्च करने गोरखपुर आए। यहां गोरक्षनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की नजर अजय सिंह पर पड़ी।

 

सन्‍यास के साथ राजनीति
अवैद्यनाथ से मुलाकात के बाद योगी आदित्यनाथ के जीवन में बड़ा बदलाव आया और उन्होंने सांसारिक मोहमाया को त्याग दिया और संन्यास की दीक्षा ले ली। संन्यास लेने के बाद ही अजय सिंह नेगी का नाम योगी आदित्यानाथ हो गया। संन्यासी बनने के कुछ वक्त बाद योगी आदित्यनाथ ने खुद को राजनीति की ओर मोड़ा और 1998 में पहली बार गोरखपुर से बतौर प्रत्याशी चुनाव लड़ा। अब ये योगी की किस्मत कहिए या वक्त का फेर या जनता की मर्जी। इन चुनावों में योगी को प्रचंंड बहुमत मिला और वह सांसद के तौर पर लोकसभा पहुंचे। एक बार सांसद की कुर्सी संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर 2002 में हिन्दू युवा वाहिनी का गठन किया। हिन्दू युवा वाहिनी के गठन के बाद योगी की काफी आलोचनाएं भी हुईं, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास के आगे किसी की नहीं सुनी।

 

दंगों के आरोप लगे
संन्यास और राजनीति के बाद योगी के जीवन में टर्निंग प्वाइंट उस वक्त आया जब 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए। इन दंगों का आरोपी योगी आदित्यनाथ को बनाया गया, उन पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हुए। मामला दर्ज होने के बाद योगी की गिरफ्तारी भी हुई, जिस पर आम जनता और राजनेताओं ने आपत्ति जताई।  बाद में 7 सितंबर 2008 योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था। इस हमले में वे बाल-बाल बचे थे।

 

2009 में मिली बंपर जीत
2007 में हुए गोरखपुर दंगों के बाद सबको लगा कि 2009 के चुनावों में योगी की छाप फीकी पड़ जाएगी। समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस तीनों ही पार्टियों ने 2009 के लोकसभा चुनावों में योगी को मात देने के लिए एड़ी-चोटी का दम लगाया, लेकिन अफसोस किसी की एक ना चली और योगी 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे।

 

विधानसभा चुनाव में झंडा बुलंद किया
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला था। इसके बाद यूपी में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम कम ठीक रहा। वहीं, 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया। इस चुनाव में योगी के चेहरे की बदलौत बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई। 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री बनाया गया। सीएम की कुर्सी पर बैठते ही योगी आदित्यनाथ ने एक के बाद एक कई एक्शन ऐसे लिए, जिसने ना सिर्फ सुर्खियां बंटोरी बल्कि राज्य के हालातों को भी ठीक किया।

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