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दर्द कभी बेजुबां नहीं होता

Posted On: 25 Mar, 2011 Others में

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vinitashukla

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दर्द कभी बेजुबां नहीं होता
अनकही दास्ताँ नहीं होता
अश्क जब बेतरह छलकते हैं
क्या अफसाना बयां नहीं होता ?
मुस्कराके यूँ गम छिपाना क्या;
खुशनुमा गीत गुनगुनाना क्या !
दिल की गहराई में दफ़न होकर,
कोई जज्बा फ़ना नहीं होता
लौ उम्मीदों की थरथराती है
आरज़ू है- मचल ही जाती है
ऐसे ख्वाबों को पंख मत देना-
जिनका कोई आसमां नहीं होता
उनकी कातिल अदा को क्या कहिये
दोस्ती और जफा को क्या कहिये!
लब पे ठहरे हुए पयामों का
उनको कुछ भी गुमां नहीं होता
हमको संगदिल बुलाने वाले सुन
आँख हमसे चुराने वाले सुन
ज़िन्दगी तब भी साथ चलती है
जब कोई रहनुमा नहीं होता

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