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सिमटा हुआ आसमान

Posted On: 6 Oct, 2012 Others में

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vinitashukla

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मुझे छूकर
गुजरती यूँ
जीवन की हलचलें –
कोई रेल मानों
पटरियों से गुजरे;
पल पल जोडूं
जीने का सामान
मेरे पास है –
एक सिमटा हुआ आसमान
मैं धुरी हूँ
निष्ठा की
संस्कारों
की वाहक
अन्नपूर्णा
भी मैं
मैं ही
कुनबे की पालक
भूलकर खुद को
जीना नहीं आसान
मेरे ………………..
टिकती जिस पर है
हर परिवार की
इमारत
बुनियाद
वह समाज की
तो गढती
बस औरत
सब हित अपने
कर देती
हंसकर कुर्बान
मेरे ……………..

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