blogid : 17137 postid : 1298887

डर

Posted On: 9 Dec, 2016 Others में

रिमझिम फुहारआँखे नीर भरी ..

विनय सक्सेना

27 Posts

59 Comments

डर

अतीत के अंधियारो

का कारवां

मिल रहा है अब भविष्य से

इक दरार पतली सी

दरमियाँ

झांकती जिससे

इक लकीर रौशनी सी

है समय रुका हुआ

यहीं अभी क्षण भर को

सदियाँ बिताने

चलने को आतुर सब

मगर घबराहट क्यू

क्यू छूटती सी जिंदगी लगे

सफर की शुरुआत से

विनय

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग