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दिल्ली की बारिश में

Posted On: 1 Sep, 2016 Others में

रिमझिम फुहारआँखे नीर भरी ..

विनय सक्सेना

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आज बरसात खुल कर हँसी
इक बार
फिर न जाने क्यू
खामोश हो गयी
तुम्हारी तरह

ये सावन भी बौरहा है
बारहा बरस जाता है
किसी को याद कर
बिलकुल मेरी तरह

विनय सक्सेना

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