blogid : 17137 postid : 824232

नव वर्ष २०१५

Posted On: 29 Dec, 2014 Others में

रिमझिम फुहारआँखे नीर भरी ..

विनय सक्सेना

27 Posts

59 Comments

नव वर्ष २०१५

शाख नयी बात नयी
जीवन की हर गात नयी
कर्मयोग का साथ लिए
रे पथिक तू साधक सा
चलता चल तू इक राह नयी

जीवन सार समझ ले इतना
मानव धरम से रिश्ता कितना
वक्त बिताया जो अब तक तूने
उसमे इंसानों सा जिया है कितना

ये द्वेष इरशा मन के भेद
अपने करम में इतने छेद
किसका क्या तू ले पाया
इसी भरम में समय गंवाया?

जो बाँट रहा उसको तो तू भूल गया
तू आप आप ही खुद रसूल हुआ
जो खोया तूने वो तू अपना समझ रहा
और जो अपना वो फ़िज़ूल हुआ ?

छोड़ पुरानी ये सोच दीवानी
खुद को दे इक नयी रवानी
जीवन के इस कोलाहल में
छेड नयी इक धुन मस्तानी

….विनय सक्सेना

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग