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मोदी जी के 100 अच्छे दिनों का लेखाजोखा

Posted On: 7 Sep, 2014 Others में

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vishnu1941

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हालांकि 49 दिन की आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार से भाजपा के अंधे भक्त हर दिन हर घंटे “आप” के चुनावी वायदों को पूरा करने का हिसाब मांगते थे पर अब केन्द्र में उनकी मोदी सरकार के 100 दिन पूरे हो जाने पर भी वह एक दिन का हिसाब देने में भी असमर्थ मालूम होते हैं। उनका कहना है कि मोदी सरकार का आंकलन करने के लिये 100 दिन काफ़ी नही हैं क्यों कि मोदी अरविन्द केजरीवाल की तरह ‘सुपरमैन’ नही हैं जिसने इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी 49 दिन में अपेक्षा से अधिक काम कर दिखाया। चलिये अरविन्द के मामले मे नहीं तो मोदी जी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार के मामले में मोदी भक्तगणों की बात मान लेते हैं कि पूरे 5 साल में 100 दिन का समय मूल्यांकन के लिये अपर्याप्त है। लेकिन बात केवल इतनी ही नही हो रही है। हमें यह तो महसूस हो कि हम देश के किस विकास मार्ग पर अपनी मंजिल की ओर चल पड़े हैं जहां हमें दिखाये गये सारे सपने पूरे होंगे। यह तो सौ दिन में अवश्य लगना चाहिए।

मोदी जी के मुख्यतः 6 चुनावी मुद्दे थे: भ्रष्टाचार, महँगाई, सीमा सुरक्षा, विकास, अर्थव्यवस्था और महिला सुरक्षा। इन क्षेत्रों मे हमें क्या हासिल हुआ या इन 100 दिनों मे इस दिशा में क्या कोशिश की गई जो कि देशवासियों को महसूस हो कि road map तैयार है और प्रयास शुरू हो चुके हैं? अभी तो मंजिल दूर दूर तक नज़र नहीं आती।

हम लोग यूपीए की सरकार में हर दिन भ्रष्टाचार की बात किया करते थे। सरकार को कोसा करते थे। चुनावी रैलियाँ और नुक्कड़ सभाओं में इस विषय पर मोदी जी ने बहुत नाटकीय भाषण दिये। क्या कोई कदम अभी तक ऐसे उठाए गए जिससे कि अहसास हो कि भ्रष्टाचार की नकेल अब कसने लगी है। देश मे जो संदेश जा रहा है वह यह है कि यह सरकार अभी तक सारे कदम भ्रष्टाचार संरक्षण के लिये उठा रही है। भ्रष्टाचार उन्मूलन संस्थाओं के पर काट कर, ईमानदार अफ़सरों को प्रताड़ित कर, येदुयरप्पा जैसे बड़े-बड़े भ्रष्टाचारियों को अपनी पार्टी में सर्वोच्च स्थान देकर, न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति द्वारा भ्रष्टाचार प्रोत्साहित कर, आरोपी पूँजीपतियों को सुरक्षा और संरक्षण देकर, भ्रष्टाचार दूर हो रहा है? ससद मे भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्बन्धी बिल बिना बहस अपनी अन्तिम सांस ले रहे हैं। पहले मोदी जी के शासनकाल में गुजरात में अनेक अपराधी और भ्रष्ट छवि के मंत्री रहे, लोकायुक्त की नियुक्ति को 15 साल वाधित किया और अब उनके केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में 13 इसी प्रकार के आरोपी मंत्री सरकार की शोभा बढ़ा रहे हैं जिनके विरुद्ध हत्या, हत्या की साजिश, बलात्कार जैसे संगीन मुकद्दमे चल रहे है। आश्चर्य यह कि सर्वोच्च न्यायालय की सलाह के बाद भी अभी तक ये लोग पदासीन हैं। आज भी भ्रष्टाचार को चरम सीमा तक पहुंचाने वाले सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाडरा जैसे इस सरकार के भी दामाद और उनके ससुराली उन्ही सुख सुविधाओं के साथ मजे उड़ा रहे हैं। इस परिवार के विरुद्ध सारी जांच पड़ताल बन्द कर दी गई है। भ्रष्टाचार पर ढक्कन रख दिया गया है। यहां तक कि राजस्थान की मुख्यमंत्री ने भी राबर्ट वाडरा के विरुद्ध सारी जांच पड़ताल रोक दी है। क्यों? क्या इसी तरह से भ्रष्टाचार मिटाने की मोदी सरकार की योजना है? केवल इतने ही उदाहरण नहीं हैं जो कि बताते हैं कि मोदी जी के चुनावी वायदों का मतलब क्या था और वह उनसे क्यों मुकर रहे हैं।

आम आदमी के लिये अच्छे दिन तब आते हैं जब उसे दोनों समय का भोजन मिल जाए। जब उसकी जेब में इतना पैसा हो कि वह अपनी दैनिक उपयोग की चीज़ें वाजिब दाम पर खरीद सके। मोदी जी बहुत जोर शोर से “बहनों और भाइयों” को सम्बोधित करते थे “बहुत हुई महँगाई की मार, अब की बार मोदी सरकार”। इसीलिए तो आज भी देश का त्रस्त आम आदमी आपसे हर दिन सवाल करता है: “कब आएँगे मेरे अच्छे दिन?” बढ़ती हुई महँगाई, रेल भाड़े, डीजल और पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी, सब्जिओं और आवश्यक वस्तुओं के आसमान छूते दाम और सरकार की चुप्पी बताते हैं कि मोदी सरकार इस विषय में कितनी गम्भीर है।

मोदी जी, बाबा रामदेव और किरण बेदी जी ने एक लुभावना सपना दिखाया था सत्ता सम्हालने के 100 दिन के भीतर विदेश से काला धन वापिस लाने का। यह देश के साथ कितना बड़ा झूठ था जिसके सहारे मोदी जी सत्ता में आए। देश से झूठ बोल कर अब कहां मुंह छिपाते हैं ये सब लोग?

पाकिस्तान और चीन से सुरक्षा के सम्बन्ध में मोदी जी ने कहा था कि “देश का सर नहीं झुकने दूंगा” “छप्पन इंच का सीना यह सुनिश्चित करेगा कि सीमा पर कोई जवान न मारा जाए।“ लेकिन सीमा सुरक्षा दल का कहना है कि जिस दिन से मोदी सरकार बनी है 1971 के बाद से सीमा पर सबसे अधिक अतिक्रमण और गोलाबारी हुई है। कितने जवान मारे गए? चीन ने कितनी बार बिना रोकटोक सीमा का अतिक्रमण किया है? क्या किया मोदी जी और उनकी सरकार ने कोई ठोस कदम के रूप में? यह सरकार और उसके प्रधानमंत्री के पाखंड को साफ़ साफ़ उजागर करता है। यह सरकार भी उतनी ही विवश और कमजोर है जितनी कि यूपीए की। जनता से गलत वायदे करके सत्ता हासिल की इसने।

अपने चुनावी भाषणों के दौरान मोदी जी मीडिया के कितने बड़े भक्त थे। इनकी इसी भक्ति के कारण मीडिया ने देश में कृत्रिम लहर पैदा कर दी। इन्हें ताज पहनवा दिया। यहां तक कि “बिकाऊ मीडिया” होने का आरोप भी झेला। पर आज इसी मीडिया की अनदेखी और दूरी रखने वाला व्यवहार? क्यों? मोदी जी का मतलब निकल गया? विकास के नाम पर यूपीए के शासनकाल की उपलब्धियों के नतीजों को अपनी उपलब्धि बताना। क्या यही है सरकार का विकास के बारे में “रोड मैप”?

कहावत है जब रोम आग की लपटों में जल रहा था तो उसका शासक नेरो अपनी ‘फ़िडिल’ बजा रहा था। आपने भी यह चरितार्थ करके जापान में ढोल-नगाड़े बजा कर आनन्द लिया।

मोदी जी ने अपने एक चुनावी भाषण में कहा था कि जनता अपनी उपेक्षा के लिये कभी भी माफ़ नहीं करेगी। धीरे-धीरे मोदी सरकार अपने लिये अपने कार्यकाल में वही स्थिति पैदा कर रही है।

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