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दिल के जुनून पर मर मिटीं

Posted On: 1 Oct, 2013 Others में

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‘आंखों की मिलन बेला से प्यार नहीं हुआ. मोहब्बत तो हुई पर दिल के एक जुनून से’

जब किसी को मोहब्बत होती है तो उसका नशा सीधा आंखों से दिल में जा उतरता है पर इन्हें जिनसे प्यार हुआ वो इनके दिल का एक जुनून था जिसके पीछे यह पागलों की तरह भागती रहीं. आंखों में बसे सपने, अभिनय की कला और स्वयं का अस्तित्व खड़ा कर दिखाने की चाहत के पीछे आशा पारेख भागती रहीं.


asha parekhआशा पारेख का जन्म 2 अक्टूबर, 1942 को गुजरात में हुआ. आशा पारेख एक मध्यम वर्गीय गुजराती परिवार से संबंध रखती थीं. आज के दिन आशा पारेख 71 साल की हो गई हैं इसलिए आज हर तरफ आशा पारेख के फिल्मी कॅरियर को लेकर चर्चाएं हो रही हैं पर एक ऐसी सीख जो आशा पारेख ने तमाम महिलाओं को दी शायद सब उसे भूल गए हैं.

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सालों से एक औरत के अस्तित्व को किसी पुरुष के सहारे के बिना अधूरा समझा जाता है पर आशा पारेख इस सोच के साथ अपना जीवन व्यतीत नहीं करना चाहती थीं. आशा पारेख ने भले ही किसी से शादी नहीं की पर वह एक चीज को दीवानों की तरह प्यार करती रहीं. उन्हें नृत्य से दीवानगी की हद तक प्यार था.


आशा पारेख को बचपन से ही नृत्य का शौक था. बचपन में शौक-शौक में नृत्य करने वाली आशा पारेख ने पण्डित गोपीकृष्ण तथा पण्डित बिरजू महाराज से भरत नाट्यम में कुशलता प्राप्त की थी. फिर क्या था उनका नृत्य देख ऐसा लगता था कि कोई मोरनी अपनी धुन में मगन होकर नाच रही हो. आशा पारेख के नृत्य की कला सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रही बल्कि अमेरिका के लिंकन थिएटर में भारत की ओर से पहली बार नृत्य की प्रस्तुति देने वाली वो पहली महिला थीं.


आज भी तमाम लोग आशा पारेख से शादी ना करने के पीछे का कारण पूछते हैं पर वो हल्की सी मुस्कान लिए हुए यही कहती हैं कि आखिरकार क्यों औरत को शादी किए बिना पूर्ण नहीं समझा जाता है ? वास्तव में आशा पारेख का निजी जीवन उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपनी चाहत को केवल पुरुष समाज से जोड़े नहीं रखती हैं बल्कि उनके भीतर किसी पक्षी की तरह खुले आसमान में उड़ान भरने का जुनून होता है और अपनी कला के सहारे तमाम जीवन भी गुजार देती हैं. आशा पारेख के जीवन को देख कुछ पंक्तियां याद आती हैं:

‘क्या कहूं , उस खुदा से जिसने मुझे ऐसा बनाया
कभी मोम , तो कभी ज्वाला बनाया
कभी खुद जली , तो कभी दूसरों ने जलाया
नहीं जानती दुनिया मेरी हकीकत
शायद इसीलिए मुझे एक पहेली बनाया’


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