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मरने के बाद भी कब्र में रहने का किराया वसूला जाता है इस जगह

Posted On: 11 Jan, 2016 Others में

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जीते जी आदमी का जीवन दुस्वारियों से भरा हुआ है. विश्व की जो वर्तमान व्यवस्था है वह पैसे पर टिकी हुई है. यहां हर चीज के लिए पैसा चुकाना पड़ता है चाहे वह कोई सेवा हो या उत्पाद. घर और बिजली के लिए तो पैसा चुकाना ही पड़ता ही है यहां तक कि अब पानी और हवा जैसी चीज जो प्रकृति मे भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, मुफ्त में नहीं मिलती. यही कारण है कि जीते जी आदमी पर हर समय पैसा कमाने का दबाव रहता है क्योंकि जिसके पास पैसा है या जो पूंजीपति हैं उन्होंने एक ऐसी विश्व व्यवस्था रची हैं जहां आपकी मामूली से मामूली जरूरत को पूरा करने के लिए भी पैसे की जरूरत पड़ती है.


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पूंजीपति वर्ग ने विश्व के लगभग सभी संसाधनों पर कब्जा कर रखा है और वह दूसरों को इन संसाधनों में तभी हिस्सा देता है जब उसे उसकी मुंंह मांगी रकम मिल जांए. क्योंकि धन उत्पन्न करने के साधन पर भी इसी वर्ग का कब्जा है इसलिए आम लोगों को मजबूरन इस वर्ग की नौकरी करनी पड़ती है वह भी उनकी शर्तों पर. इन हालातों में आदमी सोचता है कि उसकी मुक्ति अब मृत्यु के पश्चात ही संंभव है. तब वह आजाद होगा क्योंकि मरने के बाद उसे न किसी चीज की जरूरत पड़ेगी न वह पैसा कमाने कि लिए मजबूर रहेगा. लेकिन यह सोच ग्वाटेमाला में आकर गलत सिद्ध होती है क्योंकि यहां आदमी के मरने के बाद भी उसकी एक जरूरत के लिए पैसा वसूला जाता है. यह जरुरत है मृत्यु के बाद शव को सुकून से लेटने के लिए एक अदद कब्र की.


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कब्र का किराया वसूलने के लिए जो कारण बताया जाता है वह है जमीन की कमी. यहां कब्र के लिए ऊंची ईमारत बनाई गई है. कब्रों की इस बिल्डिंग में हर फ्लोर पर कई कब्र हैं. लेकिन यहां किसी भी शव को मुफ्त में नहीं रखा जाता, बल्कि उसके लिए किराया देना पड़ता है.


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अब आप सोच रहे होंगे कि मर चुका व्यक्ति भला किराया कैसे चुका सकता है. इन शवों की कब्र का किराया उनके परिजन देते हैं. अगर किसी महीने किराया नहीं दिया जाता तो अगले महीने उस शव को कब्र से बाहर निकाल कर सामूहिक कब्र में फेंक दिया जाता है.


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हैरान करने वाली बात यह है कि अमीर लोग अपनों के लिए कब्र के पैसों का जीते जी इंतजाम कर जाते हैं, ताकि उनका मुर्दा सुकून से रह सके. कई कब्र बेहद सुंदर सजी हुई हैं तो कुछ शव कब्र में जाने के इंतजार में खड़े हुए हैं. इतना ही नहीं, शहर के बाहर एक ऐसा भी ग्राउंड हैं जहां बाहर निकले हुए मुर्दों को दफन किया जाता है. यहां मुख्य तौर पर उसी मुर्दे को दफनाते हैं जिनके या तो कोई परिजन नहीं है या फिर किराया नहीं दिया जा रहा. यानी मरने के बाद भी ऐसी व्यवस्था की गई है कि अमीरी-गरीबी का भेद मिटे नहीं. Next…


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