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सच्चाई की राह पर चलना कठिन ।

Posted On: 27 Apr, 2017 Others में

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writeramansingh

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जिस प्रकार सोना आग मे तपकर अपने शुद्ध व सही होने का प्रमाण देता है ठीक उसी प्रकार एक व्यक्ति का खरापन तब ही सिद्ध हो सकता है जब वह समाज के सामने अपने सच्चेपन का प्रमाण दे सके। जिस प्रकार सोना आग मे तपकर अपनी शुद्धता का परिचय देकर एक मूल्यवान धातु का दर्जा प्राप्त कर सकता है ठीक उसी प्रकार सत्याचरण का प्रमाण देकर एक व्यक्ति समाज का विश्वास प्राप्त कर एक श्रेष्ठ व्यक्ति का दर्जा प्राप्त कर सकता है। जिस प्रकार एक सिक्के के दो पहलू होते है ठीक उसी प्रकार एक व्यक्ति के सामने दो प्रकार की राह यानि की मार्ग होते है । एक मार्ग होता है सच्चाई का और दूसरा मार्ग होता है झूठ का । दोनो ही मार्गों पर चलने का अपना अलग अलग सिद्धांत व पद्धति है । सच्चाई व झूठ मे से यदि हम बात सच्चाई की करे तो सच्चाई की राह पर चलना कठिन है। सच्चाई की राह पर अकसर मुसाफिर कम होते है। सच्चाई मानव जीवन की एक सबसे शुभ और कल्याणकारी नीति है। इस बात मे कोई दो राय नही है कि सच्चाई की राह पर चलने पर प्रारंभ मे कुछ कठिनाई हो सकती है लेकिन आगे चलकर हमको इसका लाभ होता है। उदाहरण के लिए जैसे एक किसान को अन्न की कृषि करने मे प्रारंभ मे थोड़ी कठिनाई उठानी पड़ती है और अपनी फसल के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है लेकिन जब बाद मे वह कृषि फलीभूत होती है तो घर धन-धान्य से भर देती है ठीक उसी प्रकार सच्चाई की राह पर चलने के प्रारंभ मे थोड़ा त्याग , बलिदान और धैर्य अवश्य लगता है किन्तु जब वह फलित होती है तो लोक से लेकर परलोक तक मानव जीवन को खुशियों से भर देती है। सच्चाई की राह मानव को सुख व समृद्धि के शिखर तक ले जाती है। सच्चाई की राह मनुष्य के सम्मान , प्रतिष्ठा और आत्म गौरव के लिए एक कवच के समान होती है। सत्य प्रिय व्यक्ति मिथ्यावादियो की तरह न तो कल्पना करता है और न ही अनहोनी कामनाएँ करता है। क्योंकि वह इस बात से भलीभाँति परिचित होता है कि सच्चाई की राह पर चलना कठिन तो है लेकिन सच्चाई हमेशा के लिए साथ होती है और झूठ का साथ क्षणिक मात्र होता है।

प्रेषक. अमन सिंह (सोशल एक्टिविस्ट)
पता. 224 , रोहली टोला ,पुराना शहर, बरेली (उत्तरप्रदेश)243005
मो. 8265876348
ई.मेल. Writeramansingh@gmail.com

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