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अणु में अनंत...

Posted On: 27 Nov, 2015 Others में

V2...Value and Visionextremely CRUDE ; completely PURE

yamunapathak

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1 )
अणु में अनंत

लेखन है क्या ????
थोड़ी सी रूमानियत
थोड़ी सी रूहानियत
थोड़ा सा आध्यात्म
और थोड़ा सा रोमांच
हकीकत खुरदरी सी
कल्पना रूपहली सी
कुछ सपनों की आहट
किस्सों की बौखलाहट
अलहद सी अभिव्यक्ति
समेटे लेखनी में शक्ति
सच है…
नन्ही सी लेखनी में
ब्रह्माण्ड समाता है
अणु में अनंत का
सागर लहराता है .

2 )

बहकी बाते और बहके कदम

मन चीते क्या होता है
प्रभु का चीता होता है
फिर भी समझना
जरूरी हो जाता है कि
ये दुनिया नट के रस्सी जैसी है
और अगर न हो तो भी लेने है
विवेकपूर्ण सधे सतर्क कदम
इसलिए नहीें कि
दुनिया की कई जोड़ी आंखे
गडी रहती हम पर हर क्षण
होती हैं सदा CCTV की नजर
बल्कि इसलिए कि
हम है एक
विचारवान संवेदनशील मनुष्य
अनर्गल बातें अनुचित आदतें
बहकी बाते और बहके कदम
हमारे व्यक्तित्व को धूमिल करती है ।

3)

सम्बन्ध…दरिया और चट्टान का

बहती दरिया और अडिग चट्टान
इन दोनो के बीच गहरा संबंध है
एक की अचलता दूसरे की चंचलता
एक बंधा हुआ तो दूसरा निर्बंध है
जरूरी है …..
दरिया का चट्टान से टकराना
गैरजरूरी हर बार राह बदलना
पर्वत से बूंद बूंद में टूटती दरिया
चट्टान को कण कण में काटती
ताकि…..
जमीन उर्वर हो सके
फसल लहलहा सके ।

4 )

मेरे शब्द …

खाली मकान के दरवाज़े पर दस्तक
जानती हूँ मैं की कोई नहीं है भीतर
पर फिर भी दस्तक दे देती हूँ आदतन
उम्मीद क्यों नहीं छोड़ी मैंने अब तक
सच कहूँ…
ये खाली मकान ही तो मुखर होते हैं
इन दीवारों पर यादों के असर होते हैं
जाने कितने विचारों के पहर होते हैं
यहीं सच्ची मंज़िल के डगर होते हैं.

5 )

सबब

सबब समझती हूँ मैं भी
आँखों के इस पानी का
कमबख्त सुख और दुःख
दोनों ही बयां कर जाते हैं ।

6 )

वे शब्द

बहुत भले लगते थे कड़ी धूप में
नीम की छाँव से ठंडे ठंडे शब्द
भाते लुभाते थे सर्द मौसम में
छत पर चढती धूप से वे शब्द .

यमुना

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