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करेंसी को करेंट की तरह बहने दो

Posted On: 26 Nov, 2016 Others में

V2...Value and Visionextremely CRUDE ; completely PURE

yamunapathak

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प्रिय साथियों
यमुना का प्यार भरा नमस्कार
बहुत दिनों के बाद ऐसा लग रहा है कि वाकई हम मोहनजोदड़ो अर्थात मृतकों के टीले से दूर किसी भव्य भवन की आधारशिला रखी जाने के साक्षी बन रहे हैं .ऐसा मैं इसलिए कह रही हूँ क्योंकि हमारे प्रधान मंत्री जी ने जिस तरह से आम जनता के दुःख दर्द ज़रूरतों को महसूस कर उन्हें सम्मानित स्वावलंबी ज़िंदगी जीने की राह को मज़बूत बनाना शुरू किया है वह हम भारतीयों को वाकई ज़िंदा रहने का एहसास दिला रहा है.प्रधानमंत्री जी की भावुकता को इमोशनल ड्रामा कहने वाले नेता भूल जाते हैं कि एक सच्चा इंसान ही बात बात पर भावुक हो सकता है ख़ास कर जब उसने ज़मीन से जुडी समस्याओं को उनसे उपजे दुःख को खुद महसूस किया हो ‘ ना खाऊंगा ना खाने दूंगा ‘शेर की तरह हूंकार भरने वाले प्रधानमंर्ती जी यह सब कर सकते हैं क्योंकि वे स्वयं ईमानदार हैं ..ज़मीनी जननेता .यह सब कहने और करने के लिए व्यक्तित्व की उत्कृष्टता चाहिए …जो आदरणीय मोदी जी की रगों में ईमानदारी राष्ट्र गौरव और स्वाभिमान के रूप में निर्भयता से निर्बाध बह रहा है .
दोस्तों ,हमारे रहनुमाओं की तरफ से नोटबंदी का जिस तरह से विरोध हो रहा है वह बेहद तर्कहीन है.प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री जी ने भी इसे अर्थव्यवस्था के लिए बाधक बता दिया .जब कि करेंसी का अर्थ ही है ..जो चलता रहे भ्रमण करता रहे .रूपया जितना चले समाज उतना ही सम्पन्न होता है .जिस करेंसी को सर्कुलेशन में रह कर अर्थव्यवस्था को गति देना चाहिए वह काला धन बन कर तिजोरियों में या घरों में व्यर्थ पड़ा रहता है .एक सीधा सा उदाहरण है अगर एक समाज में सौ लोग हैं और प्रत्येक के पास सौ रूपये हों पर सभी ने उस सौ की करेंसी को घर के संदूक में बंद रखा है तो क्या उससे अर्थव्यवस्था में कोई गति मिलेगी .सीधी सी बात है कि नहीं .अब प्रत्येक ने अपने सौ रूपये को बाज़ार में अलग अलग चीज़ों को ख़रीदने में लगा दिया तो बाज़ार गतिमान हो जाएगा …रोज़गार के नए नए अवसर खुल जाएंगे और अर्थव्यवस्था गतिमान हो जाएगी.गड़ा धन तो मर जाता है .जैसे कोई डबरा .करेंसी तो करंट है… धारा नदी की… जितना बहे अर्थव्यवस्था को उतना ही उर्वर बनाती जाएगी .कैशलेस इकॉनमी की बात भी सही है.मुझे आज भी याद है कि जब एटीएम की सुविधा नहीं थी तब रूपये यात्रा के दौरान छुपा कर किस तरह ले जाए जाते थे कभी अंतर्वस्त्रों में जब बनाकर उनमें सील कर ताकि चोरी ना हो सकें .एटीएम आने के बाद बेहद सहूलियत हुई .अब प्लास्टिक मनी या कार्ड से वे सभी परेशानियां दूर हो जाएँगी जो कैश को संभाल कर ले जाने के दौरान आती थीं.
हमारे शास्त्रों में दान को महत्व दिया गया है यह सिर्फ इसलिए कि जिसके पास अधिक है वह कम वालों को हस्तांतरित हो सके .सर्वे भवन्तु सुखिनः .हमारे प्रधान मंत्री जी की ये उच्च विचार आम जनता को तो समझ आ रही है पर राजनेताओं को नहीं आ रही है.आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने ५० दिनों का वक़्त माँगा है आम जनता तैयार है .अब तक जितनी करेंसी बैंकों में जमा हुई है उनसे देश विभिन्न देशों से लिए कितने क़र्ज़ चुका सकेगा.गरीबी हटाओ के नारे लगते दशक बीत गए ..योजनाओं का लाभ गरीबों ज़रूरतमंदों तक कितने कम रूप में पहुँचा इसका कारण करेंसी का ज़मींदोज़ हो जाना ही रहा जो काला धन बन कर घरों के तिजोरी तहखानों बिस्तर तकियों के अँधेरे में अपने अस्तित्व की अनुपयोगिता पर ज़ार ज़ार रोता रहा या फिर विदेशी बैंकों की पूंजी को बढ़ाता रहा उसे रोशनी में लाने की बात हो रही है तो कुछ विशेष लोगों को कष्ट क्यों हो रहा यह सभी जान रहे हैं .आम जनता को आड़ बना कर जो उनकी असहूलियत का रोना रो रहे हैं उन्हें समझना चाहिए कि आम जनता तो मोदी जी के साथ खड़ी है . अब जब घने अँधेरे को दूर करने की बात हो रही है मरी मराई सम्पदा को बाहर लाकर अर्थव्यवस्था को ज़िंदा करने की बात हो रही है तो देश को आधार देने वाले नेताओं के कदम ही लड़खड़ा रहे हैं.उन सभी नेताओं से एक ही बात कहना है ….करेंसी को करेंट की तरह बहने दें ..चलन में रहने दें …उसे रोक कर छुपा कर ….मुद्रा को काला धन बना कर मुर्दा ना बनाएं .मोदी जी का साथ दें …जिनका उद्देश्य किसी भी चीज़ की मालकियत नहीं बल्कि ‘सबका साथ सबका विकास है .

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