blogid : 9545 postid : 1314567

धूसर बादल ; सिंदूरी सूर्य

Posted On: 15 Feb, 2017 Others में

V2...Value and Visionextremely CRUDE ; completely PURE

yamunapathak

253 Posts

3036 Comments

प्रिय साथियों
यमुना का प्यार भरा नमस्कार

शारीरिक मानसिक रूप से फिट रहना शौक है या आदत यह तय करना मुश्किल है .ऐसा इसलिए कह रही हूँ क्योंकि कई बार अक्सर महिलाओं को कहते सुना है “फिट रहना मेरा पहला शौक है ” और हाँ यह शौक हो या आदत पर एक बात हम सब सर्व सम्मति से कह सकते हैं कि फिट रहना बहुत अच्छी बात है .मेरे लिए यह एक आदत या यूँ कहिये दिनचर्या का हिस्सा है .सवेरे पांच बजे से सनातन चैनल पर सुन्दर काण्ड सुनने के साथ योग करना मुझे बहुत पसंद है और शाम को टहलने जाना भी बहुत अच्छा लगता है .अब आप पूछेंगे की टहलने में कोई संगी साथी भी है .सच बताऊँ बहुत प्यारा सा साथी है और वह है ” अस्ताचलगामी सूर्य ” प्रत्येक दिन मैं कुदरत के इस अनमोल साथी से कुछ ना कुछ ज़रूर सीखती हूँ .यूँ भी अस्त होता सूर्य ..नीड़ को वापस लौटते चहचहाते पंछी ..हवा के झोंके…और इन सबके बीच चूँकि हवाई अड्डा बहुत पास है अतः हवाई जहाज के उड़ने की गड़गड़ाहट … प्रकृति और मानव जनित सृजन का अनूठा संगम .मानो कुदरत ज़िंदगी से प्रेम बरकरार रखने का मधुर गीत सुना रही हो ….साज़ भी कुदरत ….आवाज़ भी कुदरत .

आज भी हमेशा की तरह सूर्य अस्त होने को था… पंछी वापस नीड को लौट रहे थे …ना तो सूर्य की रक्तिम आभा और ना ही पंछियों की चहचहाहट.. किसी में भी थकान का आभास तक ना था …थी तो बस अपने कार्य को, अपने किरदार को बखूभी निभाने की असीम संतुष्टि .अचानक बादल के एक धूसर से टुकड़े ने रक्तिम सूर्य की तरफ बढ़ना शुरू किया मानो वह सूर्य को निगल जाएगा .मेरे तेज बढ़ते कदम सहसा ही रूक गए .उस दृश्य को मैं कुदरत के दिए उपहार ‘मन मस्तिष्क आँखों ‘ के साथ साथ मानव जनित उपहार ‘ ‘मोबाइल’ में भी कैद करने को तैयार थी .बाकी लोग जो उस जगह टहल रहे थे वे अवाक थे .”ऐसा क्या है जो ये हर कोण से इस दृश्य को कैद करने पर तुली है ”

सच बताऊँ तो ..एक तरफ बादल..वे तो बेहद ज़िद्दी लग रहे थे और दूसरी तरफ … मासूम सा सूर्य अपने किरदार को सफलता पूर्वक अंजाम देने के दर्प की लालिमा से अभिभूत था .एक तरफ बादल के जंग की ज़िद तो दूसरी तरफ सूर्य के जीने का जूनून .दोस्तों ,यह ना तो क्रिकेट का कोई रोमांचकारी मैच था और ना ही ताश के पत्तों की कोई बाज़ी .फिर भी मन कौतुहल से भरा था …अब आगे क्या ?? बादल का रंग अब धूसर से थोड़ा स्याह होने लगा …सूर्य पूर्णतः ढक चुका था फिर भी बादल के किनारे सूर्य की सिंदूरी आभा से स्वयं को रंगने से बचा नहीं पाए … ऐसा लगा मानो धूसर से टेढ़े मेढ़े कपडे के टुकड़े के किनारे एक रक्तिम घनी जालीदार झालर लगा कर किसी कुशल दर्ज़ी ने टेढ़े मेढ़े कपडे को भी सौंदर्य दे कर अपने हुनर को साबित कर दिया हो .सूर्य को ढक लेने की बादल की यह कोशिश बहुत ही अल्प क्षणों की रही .धीरे धीरे सूर्य का मध्य भाग दिखाई देने लगा .अब तक मैं मोबाइल से पूरे दस तस्वीर ले चुकी थी .इस दृश्य में सब कुछ क्षणिक था पर मेरे ज़ेहन और मोबाइल दोनों में यह स्थाई हो चुका था .

प्रिय साथियों, जीवन में भी ऐसा ही होता है.कभी कभी आपके हमारे व्यक्तित्व की लालिमा को कुछ अवांछित सामाजिक तत्वों के धूसर रंग ढकने की कोशिश करते हैं …ढक भी लेते हैं पर यकीन करियेगा कि यह क्षणिक है क्योंकि ज़िंदगी जीने की गहनता जब आधात्मिकता का रसास्वादन कर लेती है तो फिर उससे जनित दर्प की सिंदूरी आभा किसी के भी धूसर या स्याह प्रयास से छुप नहीं सकती .

….अस्ताचलगामी सूर्य अब बादलों के कुप्रभाव से मुक्त हो आराम करने जा चुका था कल फिर उदित होने के लिए उसी सिंदूरी रक्तिम आभा के साथ जन जन को नई ऊर्जा नई चेतना देने के लिए उसे भी तनिक विश्राम की ज़रुरत होती है.फिर कभी धूसर स्याह बादल उसे घेर सकते हैं या अवश्य ही घेरेंगे उसे ढक लेंगे …नैनो सेकंड …सेकंड..मिनट…घंटों..दिनों तक के लिए भी … पर वे सूर्य की आभा और चमक को स्थाई रूप से कभी छीन नहीं सकते ….कुदरत इस बात की साक्षी है .

सन्देश …..

ज़िंदगी में कितनी भी बुरी और विपरीत परिस्थितियां आ जाएं …जीने का हौसला इसलिए नहीं छोडना चाहिए क्योंकि प्रत्येक परिस्थिति क्षणिक होती है .आत्मबोध और परिपक्वता ना केवल स्वयं को बल्कि अपने आस पास के लोगों को भी ज़िंदगी के प्रति कृतज्ञता और प्रेम से भर देती है .आइये ज़िंदगी हर हाल में जीएं …क्योंकि ईश्वर ने हमें कुछ किरदार निभाने के लिए बड़े ही शौक से चुना है .आइये खुश रहे और दुःख आ भी जाए तो मन को समझाएं कि यह ज़िंदगी का दूसरा पहलू है इसे भी जीना है .
ढलता सूरज भी गीत गाता है
गुनगुनाता है कुछ ग़ज़ल
बनाता है रिश्ता अटूट
कुदरत सच कहती है
हर शाम ने तराशा है सूरज को
अलहदा अंदाज़ में .

शुक्रिया …

उन सर्जक का जिसने मुझे भी कुछ किरदार निभाने का सौभाग्य दिया …यही प्रार्थना है कि मैं उन के चुनाव के साथ न्याय कर सकूं ..

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग