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परिवर्तन कुदरत का नियम है

Posted On: 17 Mar, 2018 Others में

V2...Value and Visionextremely CRUDE ; completely PURE

yamunapathak

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नव वर्ष की बहुत बहुत बधाई ।नव वर्ष परिवर्तन की आहट होती है ।कुदरत मेें मौसम का बदलाव सब कुछ बदल देता है ।कहते भी है ‘ परिवर्तन कुदरत का नियम है ‘ Change is law of nature .इस नियम को सहज भाव से मानते हुए जिन्दगी जीना बहुत बड़ी कला है ।मैं परिवर्तन करो और परिवर्तन बनो TO change … Be change दोनों ही बातों को अहंकारी शगल मानती हूॅ ।हम किसी को बदल नहीें सकते ।खुद बदलाव बनकर मिसाल प्रस्तुत करने के अहम के बोझ को लेकर भी बहुत देर तक चल नहीें सकते ।हां कुदरत के बदलाव के साथ इंसानियत को समेटे हुए तादात्म्य अवश्य बिठा सकते है ।
ये कैसी बेचैनी का आलम है
अब कोई शब्द महफूज नहीें ।
अक्सर देखा गया है कि जब कभी भी किसी ने भी गलत बातों का विरोध किया है उसे सजा सुनाई गई है । कभी कभी तो जिन्दगी से भी हाथ धोना पड़ा है ।गलत को सुधारने की कोशिश जान देकर चुकानी पड़े यह मानव संसाधन की क्षति है ।

More right you are
More wrong you face .
Unlikes of life that attract each other

फिर एक संवेदनशील इंसान क्या करे । इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि परिवर्तन हो पर किसी भी तरह का खून न बहे ।आई आई एम लखनऊ ने इस बात की गंभीरता को समझते हुए अगले सत्र से सोशल सिटिजनशिप एंड ह्यूमन वैल्यूज का कोर्स शुरू करने का फैसला किया है, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट के तहत शुरू किए जा रहे इस विषय को हर विद्यार्थी को पास करना जरूरी होगा ।इस तरह का कोर्स शुरू करने वाला आइ आइ एम लखनऊ पहला संस्थान होगा ।
आइ आइ एम को इस तरह का कोर्स शुरू करने की प्रेरणा संस्थान के दिवंगत पूर्व छात्र एस मंजू नाथ से मिली ।वे इंडियन आयल कारपोरेशन मेें सेल्स आफिसर के पद पर कार्यरत थे और मिलावटी पेट्रोल बेचने वालों का विरोध करने पर उनकी हत्या कर दी गई थी ।इस दुर्घटना से आहत संस्थान का मानना है कि अब युवाओं को समाज मेें व्याप्त भ्रष्टाचार और जमीनी सच्चाई के बारे मे पढाया जाना चाहिए ताकि वे जमीनी हकीकत को समझ कर समस्या का समाधान करने की दिशा मेें आगे बढे ।
यह सच है कि हमारा समाज सत्य अहिंसा नैतिकता की चाहे जितनी भी बातें कर ले पर बुराई से निपटने के लिए आज भी बहुत साहस की जरूरत है ।

लहू बिखरा था जमीन पर
तारा चमका था गगन पर
शहादत पर शब्द नहीें खिलते ।

इतिहास गवाह है कि सच्चाई सदा से परेशान होती आई है, ऐसे में मौजूदा समय के साथ इंसानियत से नऽयाय किस तरह हो यह एक ज्वलंत प्रश्न है ।हमारा समाज जटिल होने के साथ विरोधाभास से भरा है ।कथनी और करनी के दरम्यान गहरे फासले हैंं ।ऐसे में बदलाव करना या बदलाव बनना दोनों ही बातों को साहस की दरकार है ।

The whole violence is the conflict between To change and Be change … both are egoistic thought .
What …to change and
to who… be change ???
Is be change phenomenon not a boastful thought as to change .

Just be … just tune to the nature and let the things happen without any conflict .

Change is the law of nature. ..and we must abide by the law being irrespective of
TO CHANGE … BE CHANGE.

Let’s Be nonviolent to self as well as to others.

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