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सियासी सिपहसालार और उनके सख्त पहरे

Posted On: 1 Oct, 2015 Others में

V2...Value and Visionextremely CRUDE ; completely PURE

yamunapathak

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मुनव्वर माँ के आगे कभी खुल कर ना रोना

जहां बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

फेसबुक मुख्यालय में माँ से सम्बंधित बात पर प्रधान मंत्री मोदी जी के भावुक क्षणों पर मुनव्वर राणा साहब का एक यह शेर मुझे बरबस याद आ गया .एक आम संतान की तरह मानवीय रिश्तों की इस संवेदनशीलता की सहज बानगी में तथाकथित कैसा नाटक था किसी भी संतान को समझ में नहीं आया ‘.माँ ‘तो एक ऐसा शब्द है जिस बात पर असहमत लोग भी सहमत हो जाएं.मानवीय रिश्तों के संबंधों में सबसे मौलिक मधुर और पावन व्याख्या है ‘माँ’ .पर नहीं….स्वदेश में कुछ लोगों ने इसे भी मुद्दा बनाने से परहेज नहीं किया .
किसी शायर ने ठीक ही कहा है…

ये नज़रें काम है या सियासत की साज़िश
हम अज़नबी ठहराए गए अपने ही वतन में

आधुनिक और परम्परा की गंगा जमुनी तहज़ीब की हिफाज़त जिस तरह से मोदी जी कर रहे हैं उससे तो प्रत्येक भारतीय को भारतीय होने पर फख्र होना चाहिए .यह ज़रूर है कि मोदी जी आधुनिक मॉम्स और पोप्स संस्कृति ( moms & pops culture)की आधुनिकता से दूर हैं पर आइंस्टीन… मार्क जुकेरबर्ग…. मंगल मिशन …जैसे वैज्ञानिकता के आधुनिकीकरण के पैरोकार हैं.माँ की कठिनाईयों को याद करने से उनका अपमान मोदी जी ने किया इस बात को पचा पाना भी बहुत मुश्किल है.सियासत का बड़ा से बड़ा खिलाड़ी भी माँ से सम्बंधित किसी बात को बहस का मुद्दा नहीं बनाएगा .”माँ से इतना प्यार है तो उन्हें अपने पास रखें” इस तरह की बचकानी बातों से नेता अपनी अपरिपक्वता ही जाहिर करते हैं.माँ अपना सुख बेटे के साथ रहने से ज्यादा बेटे के तरक्की और खुशी में पाती है.बहुत सी माएं हैं जो अपने घर आँगन को छोड़ कर बेटे के साथ परदेश नहीं जाना चाहती हैं.यूं भी मोदी जी के सूट से लेकर…..स्वच्छता अभियान तक…योग से लेकर…योजना तक …..राष्ट्रीय ध्वज से लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ तक….. हर बात को सियासी मुद्दा बनाना और विरोध करना उचित नहीं है….बुरे से बुरे आदमी के लिए भी माँ सम्मानीय होती है .माँ की गाली सुन कर बुरा से बुरा व्यक्ति भी गाली देने वाले का क्या हश्र करता है सभी जानते हैं. पर सियासत की बिसात हर गली मोहल्ले में बिछाने वाले माँ शब्द और उससे जुडी भावना को समझ नहीं पाते .क्योंकि यहां माँ मोदी जी से जुड़ा शब्द ….मोदी जी से जुड़ा रिश्ता हो जाता हैं……वाह री सियासत और वाह रे सियासी खिलाड़ी !!!!वाह रे ……सियासी सिपहसालार और वाह रे …..उनके पहरे !!!!
सच कहा है किसी ने …

हमने तो देखा है वो जहर उगलते हैं
जो लोग सियासत की आगोश में पलते हैं.

हमारे नेता यह नहीं समझ पा रहे कि में भारत की सदस्यता,आतंवाद का विरोध,स्वच्छता अभियान,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ,विदेश में राष्ट्र की अस्मिता मान सम्मान जैसे मुद्दे मोदी जी की सरकार के नहीं बल्कि संपूर्ण राष्ट्र से जुड़े मुद्दे हैं .इनका विरोध देश का अपमान है .हर बात में विरोध कतई उचित नहीं है. मोदी जी की ‘मैं ..मैंने’ …जैसे शब्द को जरूर टीम के ‘हम …हम सब’ में बदलने की आवश्यकता है.एक नेता को बरगद के वृक्ष की तरह विशाल होना चाहिए पर इतना नहीं कि अपनी स्वयं की जड़ों से ही धरती को पाटने लगे …अपने नीचे किसी पेड़ पौधे को पनपने और विकसित ही न होने दे ….अपितु नेता को तो नीम के वृक्ष की तरह होना चाहिए जो स्वाद में भले ही कड़वा होता है पर अपने प्रत्येक भाग …जड़ छल बीज पत्ते सहित उपयोगी होता है .पक्षियों के द्वारा दूर दूर तक फ़ैल जाता है.नेता के लिए अंग्रेज़ी शब्द लीडर  LEADER को ध्यान से पढ़ें तो लेटर थोड़ा इधर उधर करने से डीलर  शब्द (DEALER ) बनता है अर्थात लीडर वही है जो एक अच्छा डीलर भी हो चाहे वह जनता के साथ डील की बात हो …देश के नेताओं से या फिर सुदूर और पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध रखने की …..लीडर इज़ अ डीलर LEADER IS A DEALER .
मोदी जी और उनकी टीम के द्वारा शुरू किये योजनाओं के लिए ,उनकी विदेश यात्राओं के लिए आलोचना से ज्यादा मंथन ज़रूरी है.अगर कुछ अनुचित दिशा में हो रहा हो तो उसे संसद के सत्र में रखा जा सकता है.पर संसद सत्र सिर्फ कुछेक मुद्दों की भेंट चढ़ जाता है.सियासत के सिपलसहारों के ऐसे सख्त पहरों की वज़ह से अब मोदी जी ने भी हर बात का ज़वाब देना छोड़ दिया है क्योंकि उन्होंने समझ लिया है…

फैला हुआ है जहरे सियासत जहाँ तहाँ
करते फिरोगे आप हिफाज़त कहाँ कहाँ

दरअसल यह मानव मनोविज्ञान है कि जब सब कुछ अच्छा चलता है तब भी वह कुछ नया ताज़ा के नाम का हवाला दे कर कुछ बुरा ही सुनना कहना चाहता है.अगर देश में अच्छी बातें नहीं हो रही हैं …जन नेता सही अच्छे और नैतिक मूल्यों भरे जीवन नहीं जी रहे हैं …अच्छे दिन नहीं आ रहे हैं तो क्या किया जा सकता है !!! अच्छे काम करने वालों को सबसे ज्यादा आलोचना सुननी पड़ती है.सही नैतिक मूल्यों के बल पर ज़िंदगी जीने वाला सबसे ज्यादा परेशान किया जाता है …वैसे भी अच्छी सही सपाट हाई वे पर ही सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं.

मोदी जी की लोकप्रियता देश विदेश में बढ़ रही है….

कोई नेता तो है जो ……
समयानुकूल…

दहाड़ सकता है….
नमन कर सकता है …..
मंगल के MOM पर…… फख्र ……
धरती की माँ के त्याग पर .आंसू …
बहा सकता है.

हमें ऐसे किसी भी नेता पर गर्व है जो…
देश के गौरव के परचम को लहरा सकता है.

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