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महाभारतकालीन चंदेरी नगरी लाडनूं के विकास को संतुलित करने की पहल

Posted On: 28 Mar, 2011 Others में

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लाडनूं कस्बा नागौर जिले की लाडनूं तहसील का मुख्यालय है। लाडनूं अपने नाम के अनुरूप धनाढ्य एवं सेठों का शहर रहा है, जहां से वे भारत के विभिन्न शहरों में फैले हुए हैं। राजस्थान राज्य बनने से पहले यह जोधपुर रियासत की जागीर थी। यह नगर सुजानगढ, सीकर, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, जयपुर एवं अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। दिल्ली-रतनगढ-जोधपुर रेलवे लाइन पर यह महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। दिल्ली से यह 380 किमी एवं जयपुर से 220 किमी की दूरी पर स्थित है। बीकानेर एवं जोधपुर से इसकी दूरी क्रमश: 200 एवं 240 किमी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुसार लाडनूं नगर का अस्तिम्व महाभारत काल से है। शिशुपाल वंशी डाहलिया चन्देल वंशजों के आधिपत्य में यह चंदेरी नगरी के नाम से प्रसिद्ध था। उस समय यह मुख्य नगर के रूप में विकसित था तथा चन्देल राजाओं ने ही यहां किले का निर्माण करवाया। कालान्तर में इसका नाम महिपतिपुर और फिर लाडनूं पड़ा। यहां का प्राचीन जैन मंदिर ईसा से 200 वर्ष पुराना बताया जाता है। यहां के ऐतिहासिक स्मारकों से यह स्पष्ट होता है कि यह शहर प्राचीन समय से ही स्थापित था तथा कालान्तर में अनेक घटनाओं का शिकार हुआ। यहां के मंदिर, किले की दिवार, प्राचीन बरवडिय़ां एवं अन्य स्मारक इसके लम्बे इतिहास के साक्षी हैं। बीसवीं सदी में सन् 1909 में रेलवे लाईन, 1933 में नगरपालिका, तहसील मुख्यालय, अस्पताल, सरकारी स्कूल, मदरसा, दाल मिल, बिजली व्यवस्था आदि के विकास के बाद लाडनूं शहर का विस्तार परकोटे के बाहरी क्षेत्र में अधिक हुआ।
लाडनूं की जनसंख्या वर्ष 1971 में 28,226 व्यक्ति थी, जो वर्ष 2001 में बढकर 57,070 हो गयी। इस प्रकार 30 वर्षों में जनसंख्या में दोगुनी बढोतरी हुई है। शहर का विकास योजनाबद्ध तरीके से नहीं हुआ है। दक्षिण पूर्व में मेगा हाईवे सड़क का निर्माण होने के कारण इस ओर तेजी से आवासीय कॉलोनियां बस रही है। जो कच्ची बस्ती के रूप में बेतरतीब फैली हुई है। यहां पर सड़क, नाली, बिजली, पार्क आदि की कोई व्यवस्था नहीं है। शहर की पुरानी आबादी में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। नगर विकासोन्मुख ह अत: यह आवश्यक है कि शहर के विकास को व्यवस्थित रूप दिया जाए एवं जिससे भविष्य में इसका विकास सुनियोजित रूप से हो सके।
उपर्युक्त तथ्यों को देखते हुए, राज्य सरकार ने लाडनूं शहर का मास्टर प्लान बनाने का निर्णय लिया, तदनुसार राजस्थान नगर सुधार अधिनियम 1959 की धारा 3 उपधारा (1) के अन्तर्गत राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 13 जनवरी 2010 की अनुपालना में 7 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित करते हुए लाडनूं शहर का मास्टर प्लान बनाने के लिए लाडनूं का नगरीय क्षेत्र अधिसूचित किया तथा वरिष्ठ नगर नियोजक, अजमेर जोन अजमेर को इसका मास्टर प्लान बनाने के लिए अधिकृत किया।
मास्टर प्लान बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा आवास विकास लिमिटेड, जयपुर को दी गई जिसने नित्या अरबन स्केप, जयपुर को प्रारूप मास्टर प्लान बनाने का कार्य दिया। उक्त संस्था द्वारा लाडनूं शहर के मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में आवश्यक भौतिक सर्वेक्षण किए गए तथा विभिन्न स्रोतों से आंकड़ों एवं सूचनाओं का संकलन किया गया। मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया के बीच में लाडनूं शहर के विकास से सम्बंधित सरकारी अधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों से भी लाडनूं की समस्याओं एवं विकास की सम्भावनाओं के बारे में विचार-विमर्श किया गया।
नगर की वर्तमान परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन एवं लोगों से विचार-विमर्श के बाद वर्ष 2031 तक के लिए लाडनूं शहर का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। मास्टर प्लान में शहर की वर्तमान समस्याओं का निराकरण एवं भविष्य में इसके सुनियोजित विकास के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए हैं।
मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में नित्या अरबन स्केप, जयपुर द्वारा वरिष्ठ नगर नियोजक, अजमेर जोन अजमेर से निरन्तर सम्पर्क कर विचार-विमर्श किया गया एवं तदनुसार मास्टर प्लान को अन्तिम रूप दिया गया। क्रमश: लाडनूं कस्बा नागौर जिले की लाडनूं तहसील का मुख्यालय है। लाडनूं अपने नाम के अनुरूप धनाढ्य एवं सेठों का शहर रहा है, जहां से वे भारत के विभिन्न शहरों में फैले हुए हैं। राजस्थान राज्य बनने से पहले यह जोधपुर रियासत की जागीर थी। यह नगर सुजानगढ, सीकर, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, जयपुर एवं अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। दिल्ली-रतनगढ-जोधपुर रेलवे लाइन पर यह महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। दिल्ली से यह 380 किमी एवं जयपुर से 220 किमी की दूरी पर स्थित है। बीकानेर एवं जोधपुर से इसकी दूरी क्रमश: 200 एवं 240 किमी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुसार लाडनूं नगर का अस्तिम्व महाभारत काल से है। शिशुपाल वंशी डाहलिया चन्देल वंशजों के आधिपत्य में यह चंदेरी नगरी के नाम से प्रसिद्ध था। उस समय यह मुख्य नगर के रूप में विकसित था तथा चन्देल राजाओं ने ही यहां किले का निर्माण करवाया। कालान्तर में इसका नाम महिपतिपुर और फिर लाडनूं पड़ा। यहां का प्राचीन जैन मंदिर ईसा से 200 वर्ष पुराना बताया जाता है। यहां के ऐतिहासिक स्मारकों से यह स्पष्ट होता है कि यह शहर प्राचीन समय से ही स्थापित था तथा कालान्तर में अनेक घटनाओं का शिकार हुआ। यहां के मंदिर, किले की दिवार, प्राचीन बरवडिय़ां एवं अन्य स्मारक इसके लम्बे इतिहास के साक्षी हैं। बीसवीं सदी में सन् 1909 में रेलवे लाईन, 1933 में नगरपालिका, तहसील मुख्यालय, अस्पताल, सरकारी स्कूल, मदरसा, दाल मिल, बिजली व्यवस्था आदि के विकास के बाद लाडनूं शहर का विस्तार परकोटे के बाहरी क्षेत्र में अधिक हुआ।
लाडनूं की जनसंख्या वर्ष 1971 में 28,226 व्यक्ति थी, जो वर्ष 2001 में बढकर 57,070 हो गयी। इस प्रकार 30 वर्षों में जनसंख्या में दोगुनी बढोतरी हुई है। शहर का विकास योजनाबद्ध तरीके से नहीं हुआ है। दक्षिण पूर्व में मेगा हाईवे सड़क का निर्माण होने के कारण इस ओर तेजी से आवासीय कॉलोनियां बस रही है। जो कच्ची बस्ती के रूप में बेतरतीब फैली हुई है। यहां पर सड़क, नाली, बिजली, पार्क आदि की कोई व्यवस्था नहीं है। शहर की पुरानी आबादी में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। नगर विकासोन्मुख ह अत: यह आवश्यक है कि शहर के विकास को व्यवस्थित रूप दिया जाए एवं जिससे भविष्य में इसका विकास सुनियोजित रूप से हो सके।
उपर्युक्त तथ्यों को देखते हुए, राज्य सरकार ने लाडनूं शहर का मास्टर प्लान बनाने का निर्णय लिया, तदनुसार राजस्थान नगर सुधार अधिनियम 1959 की धारा 3 उपधारा (1) के अन्तर्गत राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 13 जनवरी 2010 की अनुपालना में 7 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित करते हुए लाडनूं शहर का मास्टर प्लान बनाने के लिए लाडनूं का नगरीय क्षेत्र अधिसूचित किया तथा वरिष्ठ नगर नियोजक, अजमेर जोन अजमेर को इसका मास्टर प्लान बनाने के लिए अधिकृत किया।
मास्टर प्लान बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा आवास विकास लिमिटेड, जयपुर को दी गई जिसने नित्या अरबन स्केप, जयपुर को प्रारूप मास्टर प्लान बनाने का कार्य दिया। उक्त संस्था द्वारा लाडनूं शहर के मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में आवश्यक भौतिक सर्वेक्षण किए गए तथा विभिन्न स्रोतों से आंकड़ों एवं सूचनाओं का संकलन किया गया। मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया के बीच में लाडनूं शहर के विकास से सम्बंधित सरकारी अधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों से भी लाडनूं की समस्याओं एवं विकास की सम्भावनाओं के बारे में विचार-विमर्श किया गया।
नगर की वर्तमान परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन एवं लोगों से विचार-विमर्श के बाद वर्ष 2031 तक के लिए लाडनूं शहर का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। मास्टर प्लान में शहर की वर्तमान समस्याओं का निराकरण एवं भविष्य में इसके सुनियोजित विकास के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए हैं।
मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में नित्या अरबन स्केप, जयपुर द्वारा वरिष्ठ नगर नियोजक, अजमेर जोन अजमेर से निरन्तर सम्पर्क कर विचार-विमर्श किया गया एवं तदनुसार मास्टर प्लान को अन्तिम रूप दिया गया। क्रमश: लाडनूं कस्बा नागौर जिले की लाडनूं तहसील का मुख्यालय है। लाडनूं अपने नाम के अनुरूप धनाढ्य एवं सेठों का शहर रहा है, जहां से वे भारत के विभिन्न शहरों में फैले हुए हैं। राजस्थान राज्य बनने से पहले यह जोधपुर रियासत की जागीर थी। यह नगर सुजानगढ, सीकर, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, जयपुर एवं अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। दिल्ली-रतनगढ-जोधपुर रेलवे लाइन पर यह महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। दिल्ली से यह 380 किमी एवं जयपुर से 220 किमी की दूरी पर स्थित है। बीकानेर एवं जोधपुर से इसकी दूरी क्रमश: 200 एवं 240 किमी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुसार लाडनूं नगर का अस्तिम्व महाभारत काल से है। शिशुपाल वंशी डाहलिया चन्देल वंशजों के आधिपत्य में यह चंदेरी नगरी के नाम से प्रसिद्ध था। उस समय यह मुख्य नगर के रूप में विकसित था तथा चन्देल राजाओं ने ही यहां किले का निर्माण करवाया। कालान्तर में इसका नाम महिपतिपुर और फिर लाडनूं पड़ा। यहां का प्राचीन जैन मंदिर ईसा से 200 वर्ष पुराना बताया जाता है। यहां के ऐतिहासिक स्मारकों से यह स्पष्ट होता है कि यह शहर प्राचीन समय से ही स्थापित था तथा कालान्तर में अनेक घटनाओं का शिकार हुआ। यहां के मंदिर, किले की दिवार, प्राचीन बरवडिय़ां एवं अन्य स्मारक इसके लम्बे इतिहास के साक्षी हैं। बीसवीं सदी में सन् 1909 में रेलवे लाईन, 1933 में नगरपालिका, तहसील मुख्यालय, अस्पताल, सरकारी स्कूल, मदरसा, दाल मिल, बिजली व्यवस्था आदि के विकास के बाद लाडनूं शहर का विस्तार परकोटे के बाहरी क्षेत्र में अधिक हुआ।
लाडनूं की जनसंख्या वर्ष 1971 में 28,226 व्यक्ति थी, जो वर्ष 2001 में बढकर 57,070 हो गयी। इस प्रकार 30 वर्षों में जनसंख्या में दोगुनी बढोतरी हुई है। शहर का विकास योजनाबद्ध तरीके से नहीं हुआ है। दक्षिण पूर्व में मेगा हाईवे सड़क का निर्माण होने के कारण इस ओर तेजी से आवासीय कॉलोनियां बस रही है। जो कच्ची बस्ती के रूप में बेतरतीब फैली हुई है। यहां पर सड़क, नाली, बिजली, पार्क आदि की कोई व्यवस्था नहीं है। शहर की पुरानी आबादी में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। नगर विकासोन्मुख ह अत: यह आवश्यक है कि शहर के विकास को व्यवस्थित रूप दिया जाए एवं जिससे भविष्य में इसका विकास सुनियोजित रूप से हो सके।
उपर्युक्त तथ्यों को देखते हुए, राज्य सरकार ने लाडनूं शहर का मास्टर प्लान बनाने का निर्णय लिया, तदनुसार राजस्थान नगर सुधार अधिनियम 1959 की धारा 3 उपधारा (1) के अन्तर्गत राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 13 जनवरी 2010 की अनुपालना में 7 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित करते हुए लाडनूं शहर का मास्टर प्लान बनाने के लिए लाडनूं का नगरीय क्षेत्र अधिसूचित किया तथा वरिष्ठ नगर नियोजक, अजमेर जोन अजमेर को इसका मास्टर प्लान बनाने के लिए अधिकृत किया।
मास्टर प्लान बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा आवास विकास लिमिटेड, जयपुर को दी गई जिसने नित्या अरबन स्केप, जयपुर को प्रारूप मास्टर प्लान बनाने का कार्य दिया। उक्त संस्था द्वारा लाडनूं शहर के मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में आवश्यक भौतिक सर्वेक्षण किए गए तथा विभिन्न स्रोतों से आंकड़ों एवं सूचनाओं का संकलन किया गया। मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया के बीच में लाडनूं शहर के विकास से सम्बंधित सरकारी अधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों से भी लाडनूं की समस्याओं एवं विकास की सम्भावनाओं के बारे में विचार-विमर्श किया गया।
नगर की वर्तमान परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन एवं लोगों से विचार-विमर्श के बाद वर्ष 2031 तक के लिए लाडनूं शहर का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। मास्टर प्लान में शहर की वर्तमान समस्याओं का निराकरण एवं भविष्य में इसके सुनियोजित विकास के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए हैं।
मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में नित्या अरबन स्केप, जयपुर द्वारा वरिष्ठ नगर नियोजक, अजमेर जोन अजमेर से निरन्तर सम्पर्क कर विचार-विमर्श किया गया एवं तदनुसार मास्टर प्लान को अन्तिम रूप दिया गया। क्रमश:

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