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बहुत शानदार रहा है ये सफ़र ( जे .जे . के साथ बिताये जो पल )

Posted On: 9 Apr, 2012 Others में

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yogi sarswat

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लाये थे मांगकर जिंदगी में चार दिन

दो याहू में कट गए दो फेसबुक में ||

जून 2011 , मैं इधर उधर घूम रहा था नेट पर कि कहीं कोई बढ़िया साईट मिल जाए जिस पर मैं अपने मन की बात को खुलकर और लोगों के साथ साझा कर सकूं ! मेरे वरिष्ठ सहयोगी एक प्रोफ़ेसर साब ने जागरण जंक्शन के बारे में बताया ! मैंने खोला ! नया नया खिलाडी था इस मैदान में ! पहली पोस्ट यहाँ इस मंच पर प्रस्तुत करी , सिर्फ एक कमेन्ट मिला ! ये ऐसा ही था जैसे किसी नए बल्लेबाज ने अपने पहले मैच में सिर्फ एक ही रन बनाया हो , और आउट हो जाये ! फिर दूसरी पोस्ट डाली लेकिन परिणाम वही , एक दो , एक दो कमेन्ट ! लगातार 10 -12 पोस्ट तक यही रहा ! लगता था कि इस विद्वता के क्षेत्र में पाँव जमाना तो क्या खड़े रह पाना भी मुश्किल होगा ! लेकिन मन में एक विश्वास था, तो लगे रहे ! और लोगों को पढ़ा , तो पाया कि यहाँ तो परम आदरणीय निशा मित्तल जी भी हैं , ज्ञान की प्रतिमूर्ति ! उनका जब सराहना भरा कमेन्ट आया तो मन खुश हुआ और फिर नई उर्जा मिलने लगी ! जब लगातार जे. जे. पर रहा तो एक से एक विद्वान और गुणी लोगों के लेख और रचनायें पढने को मिली ! श्री शशिभूषण जी की रचनायें और उनकी लेखन शैली खुद ही सिखाती है ! डॉ. सूर्या बाली जी की गज़लें आनंदित करती हैं , श्री प्रदीप कुशवाहा जी का लेखन विशिष्ट होता है ! ऐसे लोगों के संपर्क में आकर और उनका सानिध्य पाकर अपने आपको तैयार किया कि और बेहतरीन लिखना है ! परम आदरणीय श्री आर .एन . शाही ( जो अब दिखाई नहीं देते इस मंच पर ) का राजनीतिक विषयों पर लेखन इस मंच की शोभा बढ़ा रहा था ! परम प्रिय श्री आकाश तिवारी जी की कवितायेँ अनूठी और मौलिकता का जो भाव दिखाती हैं , काबिल-ए तारीफ़ था ! धीरे धीरे समझ आ रहा था कि बेटा जब तक तुम दूसरों को प्रतिक्रिया नहीं दोगे , तुम्हें कोई क्यों अपना समय देगा ? तो पहले और गुणी जनों को पढना शुरू किया और उन पर अपनी राय भी दी ! इसका तो बड़ा बढ़िया परिणाम सामने आने लगे ! अब कमेन्ट कि संख्या 10 -20 से बढ़कर 40 -50 तक पहुँच गई ! इस मंच पर श्री रक्ताले जी के दिशा दिखाते लेख , श्री आस्तिक जी की प्रशंशनीय प्रतिक्रियाएं और अलीन जी की भावनाओं में डूबी हुई रचनायें अभिभूत करती हैं ! आदरणीय राजीव कुमार झा की कवितायेँ , राजेश दुबे जी के लेख अपने आप में अतिविशिष्ट होते हैं ! श्री संतोष कुमार जी का मूरख मंच और उसी से मिलता जुलता श्री विक्रमजीत सिंह जी का साहित्य कुछ देर के लिए हँसा जाता है ! और क्या चाहिए इस जिंदगी को ? आदरणीय श्री कृष्ण जी की शुद्ध हिंदी की रचनायें इस मंच को और शोभायमान करती हैं ! अब लगभग एक साल इस मंच पर होने को है , लगता ही नहीं कि इतना समय बीत गया ! लिखते लिखाते ! कभी ठंडा कभी गरम ! हर एक स्वाद इस मंच पर मौजूद है ! हर व्यंजन मौजूद है ! साहित्य की हर विधा मौजूद है और हर विधा के माहिर , बड़े बड़े गुणी लोग यहाँ अवतरित हैं ! आदरणीय तमन्ना जी का बिना लाग लपेट के अपनी बात कहने का अंदाज़ , सोनम की मासूमियत, दीप्ति जी के बोल , सरिता जी की गहरी बातें और श्री सतीश जी के बहुत ही सरल भाषा में लिखे लेख , बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित करते हैं ! तेजवानी जी के राजस्थान के हाल चाल और विकास मेहता जी की अन्ना की टीम को शीशा दिखाती रचनायें , मनोज जी की विविधता , आनंद प्रवीण भाई की अपनी शैली , अजय कुमार पाण्डेय की बाल्यावस्था शैली ; अजय कुमार देवरिया वालों के अपने अंदाज़ ! वाह !

परम आदरणीय अलका गुप्ता जी जो विदेश में रहकर भी हिंदी की सेवा कर रही हैं , आदरणीय अब्दुल रशीद जी जिनके आशीर्वाद मात्र से कोई लेखक प्रमाणित हो सकता है , श्री जलालुद्दीन जी , श्री संजय दिक्सित जी , आदरणीय यमुना पाठक जी , आदरणीय मिनाक्षी जी , आदरणीय विनीता शुक्ल जी , श्री भ्रमर साब , श्री राकेश त्रिपाठी जी अपना कीमती समय देकर इस मंच की लगातार शोभा बनाये हुए हैं ! श्री वाधवा जी और श्री रूद्र जी, श्री सुमित जी , श्री जय प्रकाश मिश्र जी , श्री गाफिल साब , माता प्रसाद जी कभी कभार इस मंच की सैर करने आते हैं और अपनी उपस्थिति मात्र से इस मंच को और शोभायमान करते हैं ! अगर तोशी जी के विषय में ना लिखूं तो बात पूरी कैसे होगी ? एक मासूम सी जापानी गुडिया ( अपने लेखों के हिसाब से ) ! श्री बी के राय साब के दिशा दिखाते लेख , चन्दन राय जी की एक ही तरह की प्रतिक्रिया देने की कला , योगेश कुमार जी की कभी कभी की जुगाली , श्री सत्यशील अग्रवाल जी का लेखन , आदरणीय साधना ठाकुर जी का विश्लेषण , विश्लेषक जी से भी तुलना करवा देता है ! इस मंच पर प्रवीन मलिक जैसी हस्ती भी हैं जो एक बार जिस लेख पर सहमती दिखा दें वो स्वतः ही प्रमाणित हो जाता है ! आदरणीय अमिता नीरव जी के लेख , कमल कुमार जी के कार्टून , आचार्य जी की स्पष्टवादिता , पंडित आर के राय का अध्यात्म , कौशिक जी का कहना सुनना सब कुछ है यहाँ ! श्रीमती पुष्पा पाण्डेय जी , कुमार गौरव जी का कभी कभी का लिखना , लेकिन दमदार लिखना आदरणीय श्री जवाहर जी की उर्जा देती प्रतिक्रियाएं , शक्ति सिंह जी का अपना अलहदा अंदाज़ , पन्त साब का प्रतिक्रिया देने में कंजूसी का अंदाज़ , कानाफूसी जी का अद्रश्य रहना , आदरणीय ओम दीक्षित जी की सटीक बातें , गजेन्द्र प्रताप जी की लिखने की कला इस मंच पर सभी को बनाये रखती है बल्कि बांधे रखती है ! आदरणीय महिमा जी और रेखा जी की घर परिवार के किस्से कहानियां , सीमा जी कि किस्सा गोई , मीनू झा का कभी कभी अपनी बोली में बतियाना , टिम्सी मेहता का एकदम से गायब होना और फिर धमाके के साथ वापसी , श्री पारीक साब की लेखनी , डॉ.अलोक रंजन की महाभारत , परम आदरणीय श्री अबोध्बलक जी के शालीनता भरे लेख , विकास कुमार जी की रचनायें , बिरजू जी के कभी कभी के दर्शन इस मंच को महकाए रखते हैं !

जागरण जंक्शन का ये महान मंच हमें खुलकर बोलने और अपने विचार रखने का जो अवसर देता है वो बड़ी बात है ! व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए तो इस मंच ने पूरा आकाश दे दिया है . कि लिखो जितना लिख सकते हो , यहाँ हर तरह के पाठक हैं ! हर तरह की साहित्य की विधा है ! प्रथम कुछ पोस्ट पर मुझे 100 लोग भी नहीं पढ़ रहे थे , आज आपका प्यार 2700- 2800 तक पहुँच रहा है , ये संख्या कोई मायने नहीं रखती जब तक कि आपका प्यार ना मिले ! अच्छा लगता है जब कोई आपके लेखन को पढता है और उस पर अपने विचार देता है ! ये आप लोग ही हैं जिनके प्यार और आशीर्वाद ने मुझे इस मंच से एक सम्मान दिया है ! बहुत बहुत आभार ! उम्मीद करता हूँ कि हम इस मंच पर और भी ज्यादा खुलकर बोलेंगे , नए नए महारथी आयेंगे अपना कौशल दिखाने और पुराने लोगों से आशीर्वाद मिलता रहेगा !

हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोटी है

तब जाकर होता है चमन में दीदावर पैदा ||

जागरण जंक्शन परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने मुझे इस मंच के लायक समझा है और अपना समर्थन लगातार दिया है ! भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि यह मंच यूँ ही दिन रात बढ़ता रहे और देश हित और समाजहित में अपनी जिम्मेदारियों का एहसास बनाये रखे ! अब तक अगर कोई गलती हुई हो तो इस मंच के सभी लोगों से करबद्ध क्षमा याचना करता हूँ ! जो नए लोग हैं उनके लिए एक शे’र

किसी के एक आंसूं पर हज़ार दिल धड़कते हैं
किसी का उम्र भर रोना यूँ ही बेकार जाता है ||

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