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भारत का भविष्य हैं नरेन्द्र मोदी - jagran junction forum

Posted On: 19 Jun, 2012 Others में

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yogi sarswat

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गंगा और जमुना की श्यामल गौर धाराएँ
सींचती है जिस धरा को वोह हिंदुस्तान है !

कश्मीर से मुखमंडल पर हिमालय सा ताज जिसके
सागर जिसके पग पखेरे वोह हिंदुस्तान है !!


गुजरात राज्य के वडनगर, मेहसाना जिला ( तब बॉम्बे राज्य हुआ करता था ) में 17 सितम्बर 1950 को जन्मे नरेन्द्र मोदी का पूरा नाम नरेन्द्र दामोदर दास मोदी है ! मध्यम वर्गीय श्री मूलचंद दामोदर दास मोदी और हीराबेन के छः संतानों में तीसरे नंबर पर आने वाले नरेन्द्र मोदी ने राजनीति शास्त्र से परा स्नातक किया है ! बचपन से ही देश सेवा के प्रति समर्पित श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में भारतीय सैनिकों की खूब सेवा की ! नरेन्द्र मोदी ने बचपन में अपने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर चाय की दूकान भी चलाई और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्य भी रहे ! अपने विश्वविद्यालय के समय में ये आर .एस .एस . के प्रचारक रहे और शकर सिंह वाघेला के साथ मिलकर गुजरात में संघ को मजबूत किया ! वाघेला उस वक्त गुजरात के बड़े नेता माने जाते थे और नरेन्द्र मोदी को रण नीति विशेषज्ञ ! भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवानी ने उनकी प्रतिभा को पहिचाना और गुजरात के साथ साथ हिमाचल का भी कार्यभार उनके कन्धों पर डाल दिया जिसे उन्होंने बखूबी निभाया !


सन 2001 से लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र भाई मोदी में आज भारत देश की जनता अपना भविष्य टटोल रही है ! भारत की जनता को पिछले कुछ वर्षों में इतना लूटा गया है कि अँगरेज़ भी अपने आपको शर्मिंदा महसूस करते होंगे ! आज भारत का सर्वाधिक काला धन बाहर के देशों में छुपा के रखा हुआ है लेकिन लाने की कोई हिम्मत नहीं करता , लाये भी कैसे उनके आकाओं का जो है ! ये भारत देश का दुर्भाग्य है कि इसे ज्यादातर ऐसे प्रधानमंत्री मिले जो इस देश को अपनी बापोती समझते रहे और गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ के चक्कर में अपना बैंक बैलेंस बढाते रहे ! ये कैसी विडम्बना है कि भारत में लोकतंत्र होते हुए भी एक ही परिवार के तीन तीन प्रधानमन्त्री बन जाते हैं और चौथा अपने आप को इस पंक्ति में खड़ा पाता है ( लेकिन मुश्किल होगा ) ! ऐसा क्या वो वरदान लेकर आते हैं ? वरदान नहीं वो भारत की जनता को मुर्ख बनाते आये हैं और अपना उल्लू सीधा करते आये हैं ! अगर जांच कराइ जाए तो उसी परिवार का सबसे ज्यादा काला धन विदेशों की बैंक में मिलेगा ! इन्होने अपने स्वार्थ की खातिर ही एक नेक इंसान और सीधे साधे डॉ . मनमोहन सिंह को बलि का बकरा बनाते हुए प्रधान मंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया जो ना कुछ बोलता है और ना कुछ करता है ! ऐसे विद्वान , देखने में ही अच्छे लगते हैं ! प्रधान मंत्री की कुर्सी को इन्होने एक खिलौना बना दिया ! लेकिन इसमें दोष हमारा भी है क्योंकि हम ही उनकी चालों को नहीं समझ पाते हैं और लगातार उन्हें वोट देते आये हैं लेकिन अब परिस्थतियाँ बदल रही हैं ! चाटुकार अब समझ रहे हैं कि ऐसे ज्यादा दिन नहीं चल सकता इसलिए बोरिया बिस्तर बाँधने का समय आ गया है !


नरेन्द्र मोदी के रूप में भारत को एक सक्षम , ईमानदार और तेज़ तर्रार प्रधानमन्त्री मिलने को है ! सही कहूं तो एक शेर आने को है जिसके डर से चूहों की फूंक सरक रही है और उसे रोकने के लिए सारे अश्त्र शाश्त्र का उपयोग किया जा रहा है लेकिन महा ठगिनी को ये नहीं मालूम कि ये वही नरेन्द्र मोदी है जिसकी तारीफ अमेरिका भी करता है ! कॉरपोरेट के महारथी जिसके गुजरात के विकास के गीत गाते हैं , जनता जिसे लगातार अपने सिर आँखों पर बिठाये हुए है ! ऐसे नरेन्द्र मोदी की ही आज के भारत को जरूरत है ! महाठगिनी को ये डर है कि अगर मोदी प्रधान मंत्री की कुर्सी तक पहुँच गए तो उसके सारे पते ठिकाने ढूंढ लिए जायेंगे और वो बच नहीं पायेगी ! कभी कभी देश को ठगों से बचाने के लिए एक तानाशाही शाषक की जरूरत भी होती है और नरेन्द्र मोदी में वो सारे गुण परिलक्षित होते हैं जो एक शासक में होने चाहिए ! मुझे लगता है नरेन्द्र मोदी भारत के भविष्य हैं ! श्री हरिओम पंवार साब के शब्दों में :


मैं दरबारों के लिए अभिनन्दन गीत नहीं गाता
मैं ताजों के लिए समर्पण गीत नहीं गाता
गौण भले ही हो जाऊ मौन नहीं हो सकता मैं
पुत्र मोह में शस्त्र त्याग कर गुरु द्रोण नहीं हो सकता मैं
कितने ही पहरे बैठा दो मेरी क्रुद्ध निगाहों पर
मैं दिल्ली से बात करूँगा भीड़ भरे चौराहों पर
मैंने भू पर रश्मि -रथी का घोड़ा रुकते देखा है
पांच तमेंचो के आगे दिल्ली को झुकते देखा है
मैं दिल्ली का वंसज दिल्ली को दर्पण दिखलाता हूँ
इशलिये मैं अज्ञान -गंधा गीत सुनाता हूँ !!


नरेन्द्र मोदी पर ये आरोप लगता रहा है कि वो गोधरा कांड के आरोपी हैं ! रोने वाले सिर्फ एक समुदाय के नहीं हैं ! जिन्हें ना मालूम हो उनके लिए बताना चाहता हूँ की नरेन्द्र मोदी के मुख्य मंत्री के कार्यकाल में जितने दंगे हुए उससे ज्यादा कॉंग्रेस के शासनकाल में हुए हैं ! कौन भूल सकता है अहमदाबाद में 1987 में हुए दंगों को ? अब ज़रा गोधरा की बात कर लेते हैं ! मगरमच्छ के आंसूं बहाने वालों से पूछना चाहता हूँ कि गोधरा के स्टेशन पर ट्रेन में आग किसने लगाईं और क्यूँ लगाईं ? क्या सिर्फ इसलिए कि वो अपने आराध्य श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए प्रण लेने गए थे ? ये उनका दोष था ? कहाँ से आया इतना पेट्रोल कि बोगियां की बोगियां जला डाली गयीं ? उनके जान नहीं थी ? उनके बीवी बच्चे नहीं थे ? उनको जलन नहीं होती ? वो इंसान नहीं थे ? या सिर्फ वो हिन्दू थे इसलिए उनको जलाकर मार डाला गया और जब इसका प्रतिवाद आया तो सबकी त्योरियां चढ़ गयीं ? क्यों ? क्या हिन्दुओं को इस देश में जीने का हक नहीं है ? उनका क्या दोष था ? क्या उनको मारना , ट्रेन को जलाना pre planning नहीं थी ? याद करिए राजीव गाँधी के शब्द जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी ! याद आया ? उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिल ही जाती है और इसी को आधार बनाकर हजारों निर्दोष सिखों को लूटा गया और मौत के घाट उतारा गया ! तब कहाँ थी साम्प्रदायिकता की बात करने वाली ज़मात ? तब कहाँ थे धर्म निरपेक्षता का दंभ भरने वाले ? मैं बहुत छोटा था उस समय , लेकिन मेरे पिता बताया करते थे कि जो लोग दिल्ली में काम करते थे वो लगभग दूसरे तीसरे दिन बहुत सारा माल लेकर आया करते थे और जब पता पड़ा कि उन लोगों ने सिखों की दुकानों को लूट कर माल इकठ्ठा किया है तब कहाँ चली गयी मानवता ? वो भी उस समाज के प्रति जो हमारा ही एक अंग था , जिसने भारत की आज़ादी में पूरा साथ दिया ! उस समाज के साथ ये सलूक ? जब गोधरा में प्रतिवाद हुआ तब सब को लगा कि ये तो गलत हुआ , वो जो 57 कार सेवक मारे गए , निर्ममता से जलाये गए उनका किसी को कोई दुःख नहीं हुआ ? जब एक इंदिरा जी की हत्या के बदले हजारों सिखों को बर्बाद किया गया तब कुछ नहीं , जब अयोध्या से लौट रहे 57 निर्दोष कार सेवकों को जला दिया गया तब कुछ नहीं मगर जब इसका प्रतिवाद हुआ तो सब जैसे कब्र में से उठ खड़े हुए !


ज अगर देश को चोरों और महा ठगों से बचाए रखना है तो नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाना ही होगा अन्यथा हम अपने किये हुए पर पछताने के अलावा और कुछ नहीं कर पाएंगे और लूटने वाले देश को और ज्यादा लूटेंगे ! सुधि पाठक जानते हैं कि रूपया का क्या हाल हुआ पड़ा है , अभी और भी देखते जाइये ! ये महा ठगिनी इस देश के लोगों को जीने लायक नहीं छोड़ेगी ! इतने घोटाले होंगे और यही हाल रहेगा तो कोई भी यहाँ पैसा लगाने हिंदुस्तान में नहीं आएगा और फिर युवा वर्ग को नौकरियों के लाले पड़ जायेंगे ! भुखमरी होगी , अभी भी है और ज्यादा हो जाएगी ! देखते रहिये ! लूटने वाले लूट कर भाग जायेंगे और हम दाने दाने को मोहताज़ हो जायेंगे ! अब हजारों का घोटाला नहीं होता लाखों करोड़ का घोटाला होता है और प्रधानमंत्री कहता है कि कहीं कुछ नहीं हुआ ! ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए था हमें ? चोरों का सरदार चाहिए था हमें ? एक रिमोट से चलने वाला प्रधानमंत्री चाहिए था हमें ? लल्लू और महाठगिनी को अपना बॉस मानने वाला प्रधानमंत्री चाहिए था हमें ? ये भारत के लोगों को सोचना होगा कि उन्हें देश का प्रधान मंत्री चाहिए या 10 जनपथ का आज्ञाकारी नौकर ?


नरेन्द्र मोदी को केवल एक पार्टी का नेता ना समझ कर देश का भविष्य माना जाये तो ज्यादा उचित होगा ! वो ना केवल भारतीय जनता पार्टी के खेवन हार हैं बल्कि भारत के उज्जवल भविष्य के प्रतीक भी हैं ! अभी मौका है भारत की जनता के पास कि आने वाले चुनावों में अपने विवेक का पूरा उपयोग करते हुए देश के गद्दारों से कुर्सी खींचकर देश हित सोचने वाले नरेन्द्र मोदी के हाथों में देश की बागडोर सौंपकर भारत के भविष्य को उज्जवल और चमकदार बना सके !


कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है
सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है !!


जय हिंद ! जय हिंद की सेना !

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