blogid : 5476 postid : 262

रात सुहानी .....झील किनारा

Posted On: 1 May, 2012 Others में

kahi ankahiJust another weblog

yogi sarswat

66 Posts

3690 Comments

रात सुहानी झील किनारा ,पानी में दो पीले पाँव |
चाँद ख़ुशी से चूम रहा है गोरी के चमकीले पाँव ||


सागर तट पर प्रिय से मिलकर जाने वाली सुन

खोल न दें भेदी बनकर , तेरा भेद कहीं ये गीले पाँव ||


तेरे आने की आहट सुनकर ठहर गया है दरिया का पानी

तू कल फिर आएगी ? तेरी राह तकेंगे ये रेतीले पाँव ||


मुमकिन है तेरे ख्वाबों में कोई और ही बसता हो जालिम

तेरे दर पे आते आते , हो गए हैं पथरीले पाँव ||


तेरे दिल में मेरी खातिर लाख नफरत है तो नफरत ही सही

फिर भी उम्मीद ये करता हूँ , एक दिन मेरे घर आयेंगे तेरे ये शर्मीले पाँव ||


एक मैं ही नहीं अकेला जहाँ में, दीवाने हजारों बैठे हैं

जब चलते हैं , क़यामत ढाते हैं , तेरे ये मस्त नशीले पाँव ||


जब झूम झूम कर चलती हो , लाखों की जान निकलती है

जाने कितनों को घायल कर जाते हैं ये कोमल -2 जोशीले पाँव ||


जब जोर- ए- जवानी होता है सबकी इज्ज़त होती है
जब हो जाओगी उम्रदराज़ तो पड़ जायेंगे ये ढीले पाँव ||


( यह ग़ज़ल मैंने बहुत साल पहले कहीं पढ़ी थी , अब आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ )

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 19.50 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग